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    पटना में बैनरों ने बढ़ाई सियासी हलचल, क्या 2026 में JDU की कमान संभालेंगे नीतीश कुमार के बेटे निशांत?

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 10:24 AM (IST)

    पटना में नए साल पर जदयू समर्थकों द्वारा लगाए गए बैनरों ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। इन बैनरों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कु ...और पढ़ें

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    राधा कृष्ण, पटना। नव वर्ष 2026 की दस्तक के साथ ही बिहार की राजनीति में अटकलों और चर्चाओं का बाजार एक बार फिर गर्म हो गया है। राजधानी पटना के प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे जदयू समर्थकों के बैनर-पोस्टरों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इन बैनरों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने और पार्टी की अगली पीढ़ी का नेतृत्व सौंपने की मांग खुले तौर पर की गई है। बैनरों की भाषा और भाव से यह साफ झलकता है कि जदयू के भीतर एक वर्ग 2026 को नेतृत्व परिवर्तन के साल के रूप में देख रहा है।

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    पटना में लगाए गए इन बैनरों में नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ शायरी और नारे के अंदाज में संदेश लिखा गया है। 'नव वर्ष की नई सौगात… नीतीश सेवक, मांगे निशांत', 'चाचा जी के हाथों में सुरक्षित अपना बिहार… अब पार्टी के अगले जेनरेशन का भविष्य संवारें भाई निशांत कुमार' जैसे वाक्य सीधे-सीधे इस ओर इशारा करते हैं कि निशांत कुमार को पार्टी की अगली उम्मीद के तौर पर पेश किया जा रहा है। कुछ पोस्टरों में तो यहां तक लिखा गया है कि 'बिहार की जनता निशांत कुमार को राजनीति में देखना चाहती है।'

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    इन बैनरों ने इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचा है, क्योंकि जदयू और खुद नीतीश कुमार की पहचान परिवारवादी राजनीति के विरोधी नेता के रूप में रही है।

    नीतीश कुमार कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कहते रहे हैं कि राजनीति में वंशवाद बिहार के विकास के लिए घातक है और उन्होंने अपने विरोधी दलों पर इसी मुद्दे को लेकर तीखे हमले भी किए हैं। ऐसे में उनके बेटे को राजनीति में लाने की मांग वाले बैनर सामने आना अपने आप में एक बड़ा सियासी संकेत माना जा रहा है।

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    दरअसल, विधानसभा चुनाव 2025 के बाद से ही यह चर्चा समय-समय पर उठती रही है कि जदयू के भविष्य को देखते हुए निशांत कुमार को पार्टी की कमान सौंपी जानी चाहिए।

    हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस पर कभी कोई औपचारिक बयान नहीं आया, लेकिन जमीनी स्तर पर समर्थकों और कुछ नेताओं के बीच यह मांग अब खुलकर सामने आने लगी है। नव वर्ष के मौके पर लगाए गए बैनर इसी बदले हुए मूड को दर्शाते हैं।

    बैनरों में यह भी कहा गया है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को संभालने और आगे बढ़ाने के लिए निशांत कुमार को पार्टी में लाना 'पार्टी हित' में होगा।

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    संदेशों में यह भाव भी झलकता है कि 2026 बिहार की राजनीति में बड़े बदलावों का साल हो सकता है और जदयू को अगली पीढ़ी के नेतृत्व के लिए अभी से तैयारी करनी चाहिए।

    वहीं दूसरी ओर, निशांत कुमार अब तक अपनी राजनीतिक एंट्री को लेकर लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कई मौकों पर यही कहा है कि उनके पिता बिहार की सेवा कर रहे हैं और नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

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    जब भी उनसे राजनीति में आने के सवाल पूछे गए, उन्होंने उसे टालते हुए अपने पिता के कामकाज की सराहना तक ही खुद को सीमित रखा है। यही वजह है कि बैनरों के जरिए उठी यह मांग और ज्यादा रहस्यमय हो गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये बैनर केवल नव वर्ष की बधाई भर नहीं हैं, बल्कि जदयू के भीतर चल रही अंदरूनी मंथन की झलक भी देते हैं।

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    एक ओर नीतीश कुमार का परिवारवाद विरोधी रुख है, तो दूसरी ओर पार्टी के भविष्य और नेतृत्व के सवाल हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये बैनर सिर्फ समर्थकों की भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं या फिर आने वाले दिनों में जदयू की रणनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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    फिलहाल इतना तय है कि 2026 की शुरुआत बिहार की राजनीति में नए सवाल, नए संकेत और नई चर्चाएं लेकर आई है। पटना की सड़कों पर लगे ये बैनर बता रहे हैं कि सियासत में अब 'अगली पीढ़ी' को लेकर मंथन तेज हो चुका है, और इसकी गूंज आने वाले महीनों में और तेज हो सकती है।