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    CM नीतीश कुमार ने कहा-भारत सरकार को पत्र लिखें; मगध साम्राज्य से जुड़ा है मामला, बदलेगी तस्‍वीर

    By Ahmed Raza Hasmi Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 06:50 PM (IST)

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना सिटी के कुम्हरार पार्क का निरीक्षण किया, जहाँ मगध साम्राज्य के ऐतिहासिक अवशेष संरक्षित हैं। उन्होंने पार्क के बेहतर वि ...और पढ़ें

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    कुम्‍हरार पार्क में अवशेषों को देखते सीएम नीतीश कुमार। जागरण

    जागरण संवाददाता, पटना सिटी। मगध साम्राज्य के ऐतिहासिक अवशेषों को संरक्षित किए कुम्हरार पार्क का शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निरीक्षण किया।

    पार्क में बुलंदीबाग उत्खनन, कुम्हरार उत्खनन, मौर्यकालीन अस्सी स्तंभों वाले विशाल कक्ष आदि के प्रदर्शित माॅडल को देखने के दौरान इससे जुड़ी जानकारियों से अवगत हुए।

    मुख्यमंत्री ने कृष्णदेव स्मृति सभागार स्थित पाटलीपुत्र दीर्घा में कुम्हरार की मौर्य वास्तुकला, भौतिक सांस्कृतिक आयाम, कुम्हरार उत्खनन संबंधी भग्नावशेष, पाटलीपुत्र की कला, संस्कृतियों के प्रभाव आदि से जुड़ी चित्र प्रदर्शनी को देखा।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (Archaeological Survey of India) के अधीन इस पार्क को और बेहतर तरीके से विकसित करने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखने का निर्देश मुख्यमंत्री में उपस्थित पदाधिकारियों को दिया।

    नीतीश कुमार ने कहा कि कुम्हरार पार्क में मगध साम्राज्य की स्मृतियां संरक्षित हैं। इस बड़े पार्क में काफी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक, शोधार्थी व लोग आते हैं। प्राचीन इतिहास से अवगत होते हैं।

    इसके महत्व को देखते हुए पार्क का बेहतर विकास, सुंदरीकरण और अवशेषों का विशेष संरक्षण होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, जिलाधिकारी डाॅ. त्यागराजन एसएम समेत अधिकारी मौजूद थे।

    1912 से 55 के बीच दो बार की खुदाई में मिले अवशेष संरक्षित

    कुम्हरार पार्क स्थल की वर्ष 1912-15 एवं 1951-55 के बीच दो बार खुदाई की गयी। यहां मौर्यकालीन एक विशाल सभागार का 80 पिलर का अवशेष एक गड्ढे में मिला।

    भूजल स्तर में वृद्धि के कारण स्तंभ जलमग्न हो गए। एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा पर वर्ष 2005 में मिट्टी एवं बालू से गड्ढे से भर कर स्तंभ के माॅडल को यहां के दीर्घा में प्रदर्शित किया गया।

    इतिहासकारों के मुताबिक छठी शताब्दी ईसा पूर्व जब भगवान बुद्ध ने इस स्थल का दौरा किया, तब पाटलिग्राम एक छोटा सा गांव था।

    उस समय मगध साम्राज्य के राजा अजातशत्रु पाटलिग्राम को वैशाली के लिच्छवी शासकों से बचाने के लिए उसके चारों ओर एक किले का निर्माण करा रहे थे।

    बाद में पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के मध्य में राजा उदयन ने रणनीतिक एवं व्यापारिक कारणों से अपनी राजधानी को राजगृह (राजगीर) से पाटलिपुत्र में स्थानांतरित करने का फैसला किया।

    वह अजातशत्रु के उत्तराधिकारी और पुत्र थे। मेगास्थनीज जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में प्रसिद्ध यूनानी राजदूत थे। उन्होंने पाटलिपुत्र उसकी नगरपालिका और प्रशासन का विस्तृत विवरण दिया है।

    मेगास्थनीज की इंडिका नामक पुस्तक में इस नगर का उल्लेख है। यहां के पाटलिपुत्र दीर्घा में प्राचीन पाटलिपुत्र के इतिहास, कला, वास्तुकला, बुलंदीबाग और कुम्हरार स्थलों के उत्खनन से प्राप्त अवशेषों को प्रदर्शित कर महत्वपूर्ण जानकारियों का उल्लेख किया गया है।