पटना [मृत्युंजय मानी]। 'सभ्यता द्वार' का दीदार शीघ्र ही पटनावासी करेंगे। बापू सभागार और ज्ञान भवन के बीच में गगा के किनारे सभ्यता द्वार बनकर तैयार हो गया है। पाच करोड़ रुपये की लागत से 32 मीटर ऊंचे सभ्यता द्वार का निर्माण कराया गया है। यह 12 मीटर लबा और आठ मीटर चौड़ा है। सभ्यता द्वार के शीर्ष पर अशोक स्तभ दिखाई दे रहा है। सूर्यास्त होते होते लाइटिंग से यह जगमग हो जा रहा है।

सभ्यता द्वार का निर्माण राजस्थान से रेड एंड वाइट सैंड स्टोन मगाकर किया गया है। भवन निर्माण विभाग ने सभ्यता द्वार के आसपास काफी खूबसूरत गार्डेन बनाया है। गार्डेन भी पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। घास का लॉन बनाने का कार्य अंतिम चरण में चल रहे हैं। गाधी मैदान के पास स्थित देश के अजूबा भवनों में से एक ज्ञान भवन और बापू सभागार के बीच गगा किनारे वाले भाग में सभ्यता द्वार का निर्माण किया गया है। दोनों भवन स्टील के फ्रेम पर बने हैं। सभ्यता द्वार बनाते समय गगा एक्सप्रेस वे नहीं बनना था। निर्माण की योजना बनते समय तय हुआ था कि सभ्यता द्वार के पास तक गगा नदी की धारा को लाया जाएगा, मगर गगा एक्सप्रेस वे के निर्माण के कारण ऐसा करना अब सभव नहीं हो पा रहा। ऐसे में गगा के किनारे के इलाकों को हरा-भरा बनाए जाने की योजना है। स्मार्ट सिटी के डेवलपमेंट एरिया में शामिल होने के कारण भी सभ्यता द्वार के आसपास की जगह को विकसित करने की योजना बनी है।

नई दिल्ली के इंडिया गेट और मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया की तर्ज पर पटना में सभ्यता द्वार बनाया गया है। यहा छह महापुरुषों की वाणी लिखे जाने का स्थान है, लेकिन चार महापुरुषों की वाणी सभ्यता द्वार पर लिखी गई है। एक तरफ महात्मा बुद्ध और सम्राट अशोक तथा दूसरी तरफ महावीर और मेगास्थानीज की वाणी को स्थान दिया गया है। ये पर्यटकों को आकषिर् त करेगी। दर्शक भ्रमण के साथ विचार भी जान सकेंगे।

पटना का लैंडमार्क सभ्यता द्वार बिहार को गौरव दिलाने वाले महापुरुषोंकी याद दिला रहा है। द्वार पर बिहार से जुड़े चार महापुरुषों के सदेशों को लिखा गया है। बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध, जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर, सम्राट अशोक, मेगास्थानीज की वाणी पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रही है।

द्वार पर महापुरुषों के सदेश

'यह नगर आर्यावर्त का सर्वश्रेष्ठ नगर होगा और सपूर्ण आर्यावर्त का नेतृत्व करेगा, परंतु इसे आगे, पानी और आतरिक मतभेद का सदैव भय बना रहेगा।'

- भगवान बुद्ध

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'दूसरे धर्म का सम्मान करें, क्योंकि इससे अपने धर्म की प्रतिष्ठा बढ़ती है। इससे विपरीत आचरण करने से अपने धर्म का प्रभाव तो घटता ही है, दूसरे धर्म की भी क्षति होती है।'

- सम्राट अशोक

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'पाटलीपुत्र का वैभव एव ऐश्वर्य पर्सियन साम्राज्य को महान शहरों सुसा एव इकबताना से कहीं बढ़कर है'

- मेगास्थानीज

Posted By: Jagran