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    2026 में आइजीआइएमएस बनेगा इलाज का हाईटेक हब: रोबोटिक सर्जरी, 12 मॉड्युलर ओटी, 60 आईसीयू और 500 बेड से बढ़ेगा मरीजों का भरोसा

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 11:14 AM (IST)

    पटना का आइजीआइएमएस 2026 तक एक हाई-टेक मेडिकल हब बनने जा रहा है। नए साल की पहली तिमाही में रोबोटिक सर्जरी, 12 मॉड्युलर ओटी और 60 आईसीयू बेड जैसी अत्याध ...और पढ़ें

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    रोबोटिक सर्जरी से बदलेगा इलाज का अनुभव

    जागरण संवाददाता, पटना। प्रदेश के सबसे बड़े मल्टी सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) के लिए नववर्ष 2026 नई उम्मीदों, अत्याधुनिक तकनीकों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का संदेश लेकर आया है। नए साल के शुरुआती तीन महीनों में ही आइजीआइएमएस में ऐसे कई बदलाव देखने को मिलेंगे, जो न केवल इलाज की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे, बल्कि बिहार के मरीजों का भरोसा भी और मजबूत करेंगे। रोबोटिक सर्जरी से लेकर नए अस्पताल भवन के पूर्ण संचालन तक, आइजीआइएमएस 2026 में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करने की तैयारी में है।

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    आइजीआइएमएस के चिकित्साधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि वर्ष के पहले तिमाही में न्यूरो सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, जनरल सर्जरी, कैंसर व गायनी ओंको, यूरोलॉजी, हड्डी रोग, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी समेत लगभग सभी प्रमुख विभागों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही पिछले वर्ष शुरू हुए 500 बेड के नए अस्पताल भवन का पूर्ण संचालन भी आरंभ हो जाएगा। इससे संस्थान की उपचार क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी और मरीजों को अत्याधुनिक इलाज एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेगा।

    रोबोटिक सर्जरी से बदलेगा इलाज का अनुभव

    रोबोटिक सर्जरी को चिकित्सा विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। डॉ. मनीष मंडल के अनुसार, इस तकनीक से सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और कम जोखिम वाली होगी। कम चीरा लगने से दर्द और रक्तस्राव दोनों कम होंगे, जिससे मरीज जल्दी स्वस्थ होकर घर लौट सकेंगे।

    संक्रमण का खतरा भी काफी हद तक घटेगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि बेड जल्दी खाली होंगे और अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज दिया जा सकेगा।

    खासकर कैंसर, न्यूरो, यूरोलॉजी, गैस्ट्रो, गायनी और कार्डियोथोरेसिक जैसी जटिल सर्जरी में सफलता दर बढ़ेगी। अब इन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

    12 मॉड्युलर ओटी और 60 आईसीयू से बढ़ेगी क्षमता

    नए अस्पताल भवन में 12 अत्याधुनिक मॉड्युलर ऑपरेशन थिएटर और 60 आईसीयू बेड की शुरुआत से आइजीआइएमएस की सर्जिकल और क्रिटिकल केयर क्षमता में बड़ा विस्तार होगा। मॉड्युलर ओटी में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार संक्रमण नियंत्रण, बेहतर वेंटिलेशन और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होंगे।

    इससे जटिल से जटिल सर्जरी को भी सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया जा सकेगा। आईसीयू बेड की संख्या बढ़ने से गंभीर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सकेगा।

    80 नई फैकल्टी से मजबूत होगा चिकित्सकीय ढांचा

    स्पेशियलिटी और सुपरस्पेशियलिटी विभागों में 80 नई फैकल्टी की नियुक्ति से आइजीआइएमएस का चिकित्सकीय ढांचा और सशक्त होगा। इससे न केवल मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं आसानी से मिलेंगी, बल्कि शिक्षण और शोध कार्यों को भी नई गति मिलेगी। डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से ओपीडी और वार्ड में मरीजों का दबाव भी संतुलित किया जा सकेगा।

    2025 की उपलब्धियां बनीं 2026 की नींव

    डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि बीता वर्ष 2025 आइजीआइएमएस के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। इसी वर्ष 160 बेड का क्षेत्रीय चक्षु संस्थान और इमरजेंसी सेवाएं शुरू की गईं।

    500 बेड का नया अस्पताल आंशिक रूप से चालू हुआ, जिसमें 12 मॉड्युलर ओटी का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ा। इसी भवन में रोबोटिक फिजियोथेरेपी सुविधा शुरू की गई, जिससे न्यूरो और ऑर्थोपेडिक मरीजों को विशेष लाभ मिला।

    हृदय रोग विभाग में हार्ट और न्यूरो की जटिल सर्जरी के लिए बाइप्लेन कार्डियोवैस्कुलर कैथ लैब शुरू की गई। इसके साथ ही मॉलिक्यूलर फार्माकोलॉजी लैब, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में मॉड्युलर ओटी और पीडियाट्रिक ओंकोलॉजी वार्ड की शुरुआत भी हुई।

    क्रिटिकल केयर मेडिसिन आईसीयू को 22 बेड तक विस्तारित किया गया, जिससे गंभीर मरीजों को बेहतर निगरानी और इलाज मिल सका।

    ट्रांसप्लांट और ओपीडी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    आइजीआइएमएस में अब तक 1000 से अधिक कार्नियल ट्रांसप्लांट और 160 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। यह आंकड़े न केवल संस्थान की चिकित्सकीय क्षमता को दर्शाते हैं, बल्कि मरीजों के बढ़ते विश्वास का भी प्रमाण हैं।

    इसी भरोसे का परिणाम है कि यहां ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 5,000 से 8,000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

    शिक्षण, प्रशिक्षण और शोध को नई दिशा

    आइजीआइएमएस ने चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। एमबीबीएस की सीटें 100 से बढ़ाकर 150 कर दी गई हैं, जबकि स्पेशियलिटी और सुपरस्पेशियलिटी में पीजी, एमसीएच और डीएम की सीटें दोगुनी कर दी गई हैं।

    सर्जिकल ओंकोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी में डीएनबी कोर्स शुरू किया गया है, वहीं फिजियोथेरेपी विभाग में एमपीटी कोर्स की शुरुआत हुई है।

    पीजी छात्रों के लिए सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग और फैकल्टी के लिए आईआईएम बोधगया में हॉस्पिटल मैनेजमेंट ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है। एथिक्स कमेटी ने 400 से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति दी है और 300 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं।

    आईसीएमआर, सीएसआईआर समेत कई राष्ट्रीय एजेंसियों से एक्स्ट्रा म्यूरल फंड्स भी प्राप्त हुए हैं, जिससे शोध कार्यों को और गति मिली है।

    नववर्ष 2026: भरोसे का नया अध्याय

    कुल मिलाकर, नववर्ष 2026 आइजीआइएमएस के लिए सिर्फ कैलेंडर बदलने का संकेत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में एक नए युग की शुरुआत है।

    रोबोटिक सर्जरी, अत्याधुनिक ओटी, बढ़े हुए आईसीयू बेड, नई फैकल्टी और मजबूत शिक्षण-शोध व्यवस्था के साथ आइजीआइएमएस अब बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और हाईटेक मेडिकल हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह बदलाव न सिर्फ मरीजों को बेहतर इलाज देगा, बल्कि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को भी नई पहचान दिलाएगा।