पटना [राज्य ब्यूरो]। इंटर परीक्षा में जीरो रिजल्ट वाले विद्यालयों के 50 वर्ष से अधिक उम्र के शिक्षकों को सरकार हटा देगी। उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को शिक्षा विभाग के इस कड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इस वर्ष इंटर की परीक्षा में जिस स्कूल का एक भी विद्यार्थी पास नहीं हुआ, ऐसे विद्यालयों की संख्या ढाई सौ के करीब है। वहां के शिक्षकों पर गाज गिरेगी। शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। खराब रिजल्ट वाले जिलों में तैनात शिक्षा विभाग के अफसरों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी। संबंधित शैक्षिक सत्र में उन जिलों में तैनात अफसरों की सूची तैयार की जा रही है।
पांच फीसद रिजल्ट वाले स्कूल भी कार्रवाई के दायरे में
सरकार की नजर उन विद्यालयों पर भी है, जहां बामुश्किल पांच प्रतिशत परीक्षा परिणाम हुआ। वैसे पहले चरण में शून्य परीक्षा परिणाम वाले जिलों को लिया जाएगा।
माह भर के भीतर होगी कार्रवाई
समीक्षा बैठक में सीएम के साथ उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, शिक्षा मंत्री केपी वर्मा, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन विशेष रूप से शामिल हुए। फैसले की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि 50 से ऊपर के शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने का काम माह भर के भीतर होगा। ऐेसे विद्यालय पूर्व से चिन्हित हैैं।
इंटर परीक्षा का पैटर्न भी बदलेगा
सरकार इस बार इंटर परीक्षा में परीक्षा के प्रारूप में बदलाव करने जा रही। परीक्षा में ऑब्जेक्टिव प्रश्न की संख्या बढ़ेगी। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा। 
तीन बार फेल शिक्षकों को तुरंत हटाएंगे
वैसे नियोजित शिक्षक जो पात्रता परीक्षा में तीन बार फेल हो गए हैं, उन्हें सरकार तुरंत स्कूल से बाहर करेगी। उनके मामले में किसी तरह का विचार नहीं किया जाएगा।
अंग्रेजी, विज्ञान, गणित की चलेगी स्मार्ट क्लास
अंग्रेजी, विज्ञान और गणित के शिक्षकों की अनुपलब्धता को दूर किए जाने तक सरकार ने यह निर्णय लिया है कि हाई स्कूलों और प्लस टू स्कूलों में इन विषयों की पढ़ाई स्मार्ट क्लास के माध्यम से होगी। इसके लिए बाहर की एजेंसी तय होगी।
सितंबर तक स्कूली बच्चों को मिल जाएगी किताबें
स्कूली बच्चों को अभी तक सरकार से मुफ्त किताबें नहीं मिली हैं। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में यह निर्णय हुआ कि सितंबर में किताबें मिल जाएंगी। जिस केंद्र सरकार के उपक्रम को इन किताबों के प्रकाशन के लिए कागज उपलब्ध कराना था, वह बंद हो गयी। सरकार ने नया फैसला लिया है कि जो प्रकाशन संस्थान किताबें प्रकाशित करेगा उसे ही कागज की व्यवस्था करनी है।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के लिए बनेगा निगम
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की योजना रफ्तार नहीं पकड़ रही है। बीस हजार आवेदनों में अब तक मात्र चार हजार आवेदन ही राज्य भर में स्वीकृत हुए हैैं। सरकार ने बैैंकों के रवैये से परेशान हो यह तय किया है कि अब इसके लिए वित्त निगम की तर्ज पर एक निगम बनाया जाएगा।
फिर शुरू होगी छात्रवृत्ति
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जात व अल्पसंख्यकों को मिलने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति पुन: शुरू होगी। बाद में इसके लिए भी एक सोसायटी का गठन होगा।

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