Bihar Politics: दिलीप जायसवाल को किसी ने नहीं दी टक्कर, BJP ने बनाए रखी सर्व-सम्मति की परंपरा
डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल सर्वसम्मति से बिहार भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष चुने गए हैं। भाजपा में अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध निर्वाचन की परंपरा रही है। दिलीप जायसवाल ने एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत के तहत राज्य मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दिया था। वह वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं। दिलीप जायसवाल के पास विभिन्न पदों पर दो दशक का कार्य-अनुभव है।

राज्य ब्यूरो, पटना। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल (Bihar BJP Dilip Jaiswal) का निर्वाचन औपचारिकता-मात्र ही था। नीतीश सरकार में भूमि व राजस्व मंत्री के पद से 26 फरवरी को उनके त्यागपत्र के साथ ही इसका संकेत मिल गया था कि बिहार भाजपा की कमान उनके ही हाथों में रहनी है और उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) की रणनीति भी बनानी है।
एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत के अंतर्गत दिलीप ने राज्य मंत्रिमंडल (Bihar Cabinet) से त्यागपत्र दिया था। पिछले वर्ष 24 जुलाई को सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) के स्थानापन्न उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभाला था। उपमुख्यमंत्री बन चुके सम्राट को भी इसी सिद्धांत के कारण सांगठनिक पद छोड़ना पड़ा था।

सम्राट की तरह दिलीप भी MLC
सम्राट की तरह दिलीप भी अभी विधान परिषद के सदस्य हैं। भाजपा में विभिन्न पदों पर दो दशक के कार्य-अनुभव के साथ परिषद में उनका यह तीसरा कार्यकाल है। हालांकि, सम्राट की तरह दिलीप ने भी राजनीति की शुरुआत किसी और दल से की और उसके बाद भाजपा में आए। सम्राट के पूर्ववर्ती डॉ. संजय जायसवाल की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही रही है।
सर्व-सम्मति से चुने गए दिलीप
दिलीप मंगलवार को सर्व-सम्मति से प्रदेश अध्यक्ष चुने गए। खचाखच भरे बापू सभागार में हुई बैठक में प्रदेश परिषद ने उनके नाम पर अपनी मुहर लगाई। मुकाबले में कोई था भी नहीं। एकमात्र उन्हीं का नामांकन था। भाजपा में अध्यक्ष के पद पर निर्विरोध निर्वाचन की वैसे भी अघाेषित व्यवस्था है। पिछली सदी के दो अवसरों को दरकिनार कर दें तो पिछले ढाई दशक से उस परंपरा का पूर्णतया अनुपालन हो रहा।
हालांकि, टकराव के उन दो अवसरों पर संगठन के भीतर लोकतंत्र का सजीव स्वरूप देखने को मिला था। उस एक अवसर के नायक नंदकिशोर यादव आज विधानसभा के अध्यक्ष हैं। वह वर्ष 1998 था। कद्दावर जनार्दन यादव को पराजित कर नंदकिशोर प्रदेश अध्यक्ष चुने गए थे।
प्रदेश अध्यक्ष के पद पर सर्वाधिक लंबा कार्यकाल उन्हीं का रहा है। उनसे पहले वैसी ही स्थिति 1994 में बनी थी। तब अश्विनी कुमार का संघर्ष रामदेव महतो से हुआ था। विजय तिलक अश्विनी कुमार को लगा।
बिहार भाजपा के इतिहास में वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति रहे, जो उत्तर प्रदेश से संगठन कार्य के लिए बिहार आए और बाद में प्रदेश अध्यक्ष के पद तक पहुंचे। तब अध्यक्ष का कार्यकाल दो वर्षीय था।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष:
- कैलाशपति मिश्रा (1980 से 1981)
- जगदंबी प्रसाद यादव (1981 से 1984)
- कैलाशपति मिश्रा (1984 से 1987)
- इंदर सिंह नामधारी (1988 से 1998)
- ताराकांत झा (1990 से 1993)
- अश्विनी कुमार (1994 से 1996)
- यशवंत सिन्हा (1997 से 1998)
- नंदकिशोर यादव (1998 से 2003)
- गोपाल नारायण सिंह (2003 से 2005)
- सुशील कुमार मोदी (2005 से 2006)
- राधामाेहन सिंह (2006 से 2010)
- डॉ. सीपी ठाकुर (2010 से 2013)
- मंगल पांडेय (2013 से 2016)
- नित्यानंद राय (2016 से 2019)
- संजय जायसवाल (2019 से 2023)
- सम्राट चौधरी (2023 से 2024)
- दिलीप जायसवाल (2024 से)
हमें ऐसा संगठन बनाना है जो चट्टानी एकता की शक्ति दिखाए। बूथ इकाई तक को मुख्य धारा से जोड़कर विशाल संगठन तैयार होगा। भाजपा के कार्यकर्ता देश की दूसरी सेना हैं। एक सेना अगर सीमा पर देश की रक्षा करती है तो भाजपा के कार्यकर्ता सीमा के भीतर राष्ट्र की विचारधारा और संस्कृति को जीवित रखने का कार्य करते हैं। हमारा भरोसा कीजिए, कार्यकर्ताओं को भरपूर सम्मान मिलेगा। - दिलीप कुमार जायसवाल
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