पटना, अरविंद शर्मा। Caste Census in Bihar Politics विभिन्न जातियों की आबादी जानने के लिए बिहार के तमाम राजनीतिक दल बेताब हैं। सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खुद को अलग रखा है, मगर वोट बैंक के प्रभावित होने के डर से वह भी इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से परहेज कर रही है। बिहार विधानसभा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के हालिया कदम के बाद राजनीतिक दलों में खलबली है। अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के जवाब की प्रतीक्षा कर रहे जनता दल यूनाइटेड (JDU) को फैसला लेने के लिए राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) ने तीन दिनों का अल्टीमेटम देकर असमंजस में डाल दिया है। वोट बैंक में इजाफा के लिए इसे बेहतर मुद्दा मानकर अन्य दल भी जल्दी में हैं। 

आंदोलन की तैयारी में महागठबंधन के घटक दल

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन (Mahagathbandhan) के घटक दल इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। एलान हो चुका है। जाहिर है, इसका श्रेय वह किसी और को नहीं लेने देना चाहते है। इससे साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा जोर पकड़ सकता है। बिहार में अभी चुनाव नहीं है, लेकिन लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने अपने इस अभियान में यूपी के समाजवादी पार्टी समेत कुछ अन्य दलों को भी शामिल कर लिया है।

बिहार के बाहर भी आंदोलन फैलाने की कोशिश

आंदोलन की आग को बिहार के बाहर भी फैलाने की कोशिश की जा रही है। तेजस्वी यादव ने इसी नीयत से देश भर के विभिन्न दलों के 33 प्रमुख नेताओं को पत्र लिखकर जातिगत जनगणना पर समर्थन मांगा है।

सीएम नीतीश के साथ खड़े एनडीए के घटक दल

हैरानी इस बात पर है कि बिहार में बीजेपी के समर्थन से सरकार चला रहे राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तमाम दल भी चाहते हैं कि जातियों के आधार पर जनगणना कराई जाए। केंद्र अगर तैयार नहीं होता है तो राज्य सरकार अपने खर्चे पर कराए। विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कोटे से 11 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) का हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) भी इस मुद्दे पर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात के दौरान बिहार की 10 पार्टियों के शीर्ष नेता नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के साथ थे। 

वोटरों में पहुंच बढ़ाने का माध्यम मान रहे लालू

जातिगत जनगणना को लालू प्रसाद यादव 2010 से ही वोटरों में पहुंच बढ़ाने का माध्यम मान रहे हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव के पहले उन्होंने इसे जोर-शोर से उठाया भी था। बीजेपी को भी वोट बचाने की चिंता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए जब 23 अगस्त को बिहार से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जा रहा था, तब उसमें बीजेपी ने भी अपने एक मंत्री जनक राम को प्रतिनिधि के रूप में भेजा था। विधानसभा और विधान परिषद में भी सबने एक स्वर से जातिगत जनगणना का समर्थन किया था। 

Edited By: Akshay Pandey