क्या संजय सरावगी बढ़ाएंगे कदम? BJP प्रदेश अध्यक्ष रहते सम्राट और जायसवाल नहीं कर सके थे यह काम
Bihar News: संजय सरावगी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश कार्यसमिति के गठन की उम्मीदें बढ़ी हैं। पूर्व अध्यक्ष दिलीप जायसवाल डेढ़ साल तक इसक ...और पढ़ें

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल। जागरण आर्काइव
रमण शुक्ला, पटना। Bihar Politics: भाजपा के नव मनोनीत प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से संगठनात्मक फैसलों को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
विशेषकर प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा को लेकर पार्टी के भीतर उत्सुकता का माहौल है। इसके पीछे कारण डेढ़ वर्ष का पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का कार्यकाल है।
वे बगैर प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा किए संगठन का संचालन करते रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि संजय सरावगी अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही संक्रांति उपरांत संगठन को गति देने के लिए कार्यसमिति गठन पर अहम फैसला ले सकते हैं।
हालांकि प्रदेश पदाधिकारियों के दायित्व में ज्यादा फेर बदल की गुंजाइश नहीं दिख रही है। कारण यह कि पिछले दो प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी एवं दिलीप जायसवाल अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही मंत्री बना दिए गए।
दायित्व में परिवर्तन के कारण आधे कार्यकाल में दोनों की कैबिनेट का पुनर्गठन हुआ। इसमें कुछ प्रदेश पदाधिकारी बाहर हुए। कुछ पुराने की वापसी हुई।
साथ ही कुछ नए कार्यकर्ताओं को दायित्व देकर संगठनात्मक कौशल को उभारने का प्रयास किया गया। फिर भी संभावना है कि सरावगी कुछ चेहरे बदल सकते हैं।
निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता
सरावगी की नई कार्यसमिति में संगठन के प्रति निष्ठावान, सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
इसके साथ ही क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इससे संगठन में नई ऊर्जा का संचार होने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
नव मनोनीत अध्यक्ष संजय सरावगी ने अपने शुरुआती बयानों में संगठन को सर्वोपरि बताते हुए कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीढ़ करार दिया है।
ऐसे में कार्यसमिति की घोषणा को उनके नेतृत्व की पहली बड़ी संगठनात्मक कसौटी के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि नई टीम के जरिए सरावगी अपने नेतृत्व की स्पष्ट दिशा और कार्यशैली का संकेत देंगे।
कार्यसमिति गठन के माध्यम से आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने की तैयारी की जा रही है। भाजपा नेताओं में उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
सरावगी से कार्यसमिति की जल्द घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है, जिसे संगठन में संतुलन, सक्रियता और नए उत्साह का प्रतीक माना जा रहा है।
सात मोर्चों का बदलेगा दायित्व
पार्टी के फ्रंटल संगठनों के दायित्व में फेरबदल की संभावना प्रबल हो गई है। जायसवाल के कार्यकाल में महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहीं धर्मशीला गुप्ता का कद बढ़ाकर प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया गया।
किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज सिंह को प्रदेश मंत्री बना दिया गया था, लेकिन अन्य फ्रंटल संगठन के अध्यक्षों का दायित्व पूर्ववत बना रहा।
इसी तरह विभाग, प्रकल्प, प्रकोष्ठ एवं अन्य संयोजक के दायित्व में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था। दिलीप के नेतृत्व में प्रदेश पदाधिकारी बनने से वंचित जिलों के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की अब पहली कोशिश किसान, युवा, महिला, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक मोर्चा में जगह बनाने की है। इसमें भी अगर बात नहीं बनी तो फिर विभाग, प्रकल्प और प्रकोष्ठ पर दावेदारी कर रहे हैं।
विभाग, प्रकल्प और प्रकोष्ठ के चेहरे तय
बता दें कि भाजपा में 19 विभाग, नौ प्रकल्प और 17 प्रकोष्ठ के गठन पर नजर टिकी है। चिकित्सा प्रकोष्ठ, विधि प्रकोष्ठ, वाणिज्य प्रकोष्ठ के साथ ही केंद्र-राज्य शासकीय कार्यक्रम समन्वय विभाग, नीति विषयक शोध विभाग, मीडिया विभाग, मीडिया संपर्क विभाग, प्रशिक्षण विभाग, राजनीतिक प्रतिपुष्टि और प्रतिक्रिया विभाग, राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं बैठक विभाग, डाक्यूमेंटेशन एवं ग्रंथालय विभाग, सहयोग, आपदीय राहत एवं सेवाएं विभाग, अध्यक्षीय कार्यालय प्रवास एवं कार्यक्रम विभाग, प्रचार-प्रसार निर्माण विभाग प्रमुख और उनकी टीम बनाई जानी है।
इसके अलावा ट्रस्ट समन्वय विभाग, चुनाव प्रबंधन विभाग, चुनाव आयोग संपर्क विभाग, कानूनी और विधिक विषय विभाग, पार्टी पत्रिकाएं तथा प्रकाशन विभाग, आइटी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्रबंधन विभाग, विदेश संपर्क विभाग एवं आजीवन सहयोग निधि विभाग के प्रमुख और उनकी भी टीम बनाई जानी है।

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