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Bihar Politics: पहली-दूसरी पीढ़ी को तो छोड़िए, इस बार तीसरी पीढ़ी के विधायक भी सदन में आ गए

Published: Mon, 01 Dec 2025 05:23 PM (IST)

राजनीति में वंशवाद कोई नई बात नहीं है। अक्सर पहली और दूसरी पीढ़ी के नेता देखने को मिलते हैं, लेकिन ...और पढ़ें

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HighLights

  1. तीसरी पीढ़ी के विधायकों का सदन में प्रवेश

  2. राजनीति में परिवारवाद का बढ़ता चलन

  3. राजनीतिक विरासत का अगली पीढ़ी में हस्तांतरण

राज्य ब्यूरो, पटना। पहली पीढ़ी की कोई बात नहीं। दूसरी पीढ़ी वाले भी बहुत हैं। 18वीं विधानसभा में तीसरी पीढ़ी की भी आमद हो गई है। इनके अलावा ऐसे विधायक भी हैं, जिनके माता-पिता भी सदन की शोभा बढ़ाते रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पौत्री करिश्मा राय सारण के परसा से राजद की विधायक बनी हैं।

स्व. राय की धर्मपत्नी भी विधायक थीं। उनके पुत्र चंद्रिका राय परसा से कई बार विधायक रह चुके हैं। अबतक हुए कुल 18 चुनाव और एक उपचुनाव को जोड़ दें तो करिश्मा के रूप में स्व. दारोगा राय परिवार की यह नौंवी जीत है।

इस्लामपुर के जदयू विधायक रूहेल रंजन विधानसभा में तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके दादा स्व. रामशरण सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। मंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे। पिता स्व. राजीव रंजन इस्लामपुर के विधायक थे।

कुशेश्वर स्थान से जदयू टिकट पर जीते अतिरेक कुमार के दादा स्व. बालेश्वर राम सांसद और विधायक थे। वे केंद्र सरकार में मंत्री भी थे। अतिरेक के पिता डॉ. अशोक कुमार राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। छह बार विधायक भी रहे हैं।

भाजपा के दानापुर विधायक और कृषि मंत्री ने सोमवार को पहली बार विधायक पद की शपथ ली। वे विधान परिषद, राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य के अलावा पटना के निगम पार्षद और डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं।

सांसद और विधायक की संतानों में केवल राजद के तेजस्वी यादव ही नहीं हैं। नवीनगर से जदयू टिकट पर जीते चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन सांसद-विधायक रह चुके हैं। उनकी मां लवली आनंद अभी सांसद हैं। वह दो बार विधायक भी रही हैं।

जमुई से भाजपा टिकट पर दूसरी बार जीती श्रेयसी सिंह के पिता स्व. दिग्विजय सिंह सांसद लोकसभा-राज्यसभा के सदस्य और केंद्र सरकार में मंत्री थे। श्रेयसी की मां पुतुल देवी भी बांका से सांसद रह चुकी हैं।

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