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    ROB के डिजाइन ही खो गए; बिहार में न‍िर्माण से पहले यह क्‍या हो गया? क‍ितने रेल ओवरब्र‍िज का है मामला?

    By Bhuwaneshwar Vatsyayan Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Sun, 04 Jan 2026 06:42 PM (IST)

    बिहार में रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) निर्माण में समन्वय की कमी से परेशानी हो रही है। पथ निर्माण विभाग द्वारा रेलवे को भेजे गए चार आरओबी के डिजाइन गुम हो गए ...और पढ़ें

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    चार आरओबी के ड‍िजाइन खो गए। सांकेत‍िक तस्‍वीर

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में पथ निर्माण विभाग की देखरेख में बन रहे रेल ओवर ब्रिज के निर्माण में समन्वय के स्तर पर कई तरह की परेशानी है।

    समन्वय का हाल यह है कि जब ROB को लेकर बैठक होती है तो खानापूर्ति के अंदाज में रेलवे के कनीय अधिकारी आते हैं और कई तरह का परामर्श साथ लेकर चले जाते हैं।

    रेलवे के साथ समन्वय को लेकर हाल ही में हुई बैठक में एक दिलचस्प मामला सामने आया। पथ निर्माण विभाग ने रेलवे के पास आरओबी के चार डिजायन को मंजूरी के लिए भेजा था।

    ड‍िजाइन की स्‍वीकृत‍ि के बिना नहीं बढ़ सकता काम

    बिहार राज्य पुल निर्माण निगम राज्य सरकार के स्तर पर आरओबी निर्माण के लिए एजेंसी है। समन्वय की बैठक में जब चार आरओबी के डिजायन का अपडेट समझा गया तो यह मालूम हुआ कि रेलवे के स्तर पर सभी चारो डिजायन गुम हो गए हैं।

    अब फिर से रेलवे को डिजायन भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हाेने वाली है। पथ निर्माण विभाग का संकट यह है कि आरओबी के डिजायन की स्वीकृति के बगैर प्रोजेक्ट के लिए कोई काम आरंभ नहीं हो सकता।

    न तो एनआईटी बन सकता है और न ही डिजायन को लेकर कुछ और आकलन संभव हो पाता है। ऐसे में विलंब की वजह से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाती है। 

    इस संबंध में पथ निर्माण विभाग ने रेलवे को कहा कि डिजायन की स्वीकृति को लेकर तेजी बरती जाए। कई शहरों से मंजूरी का मामला आगे बढ़ता है। इस कारण विलंब होता है।

    रेलवे अधिकारियों के साथ होगी बैठक

    वरीय अधिकारियों को समन्वय का जिम्मा दिया जाए। पथ निर्माण विभाग के वरीय अधिकारी स्वयं रेलवे के संबंधित दफ्तर में जाकर वरीय अधिकारियों के साथ इस संबंध में बैठक करने वाले हैं। 

    बिहार में आरओबी के कई मामले कास्ट शेयरिंग के आधार पर हैं। रेलवे को इसके तहत ट्रैक के हिस्से का निर्माण करना है और एप्रोच रोड का निर्माण पथ निर्माण विभाग को करना है। इस तरह के आरओबी के निर्माण में काफी परेशानी है। सालों तक डिजायन को अनुमति नहीं मिल पाती है।