'हम जिंदा हैं…!' साबित करने CSC सेंटरों पर उमड़ी भीड़, लंबी कतारों पर सरकार ने कहा– घबराएं नहीं
बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत जीवन प्रमाणीकरण के लिए CSC सेंटरों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारक अपनी पे ...और पढ़ें

CSC सेंटरों पर उमड़ी भीड़
जागरण संवाददाता, पटना।बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत जीवन प्रमाणीकरण (लाइफ सर्टिफिकेट) को लेकर इन दिनों गांव-गांव कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारक बड़ी संख्या में यह साबित करने पहुंच रहे हैं कि वे जीवित हैं, ताकि उनकी पेंशन बंद न हो। हालात ऐसे बन गए कि कई जगहों पर सुबह से ही CSC सेंटरों के बाहर भीड़ जुटने लगी, जिससे प्रशासन और सरकार दोनों की चिंता बढ़ गई।
दरअसल, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार और कॉमन सर्विस सेंटर के संयुक्त प्रयास से सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के ई-लाभार्थियों के लिए जीवन प्रमाणीकरण की सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
नियम के अनुसार, सभी पेंशनधारकों को वर्ष में एक बार जीवन प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य है। इसी प्रक्रिया के तहत आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि लाभार्थी जीवित है और वास्तविक पात्र है।
हालांकि विभाग की ओर से जीवन प्रमाणीकरण के लिए किसी तरह की अंतिम तिथि तय नहीं की गई है, इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों में अफवाहों और भ्रम की वजह से पेंशनधारकों में डर का माहौल बन गया।
लोगों को लगने लगा कि यदि जल्द से जल्द जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराया गया, तो उनकी पेंशन रुक सकती है। इसी डर के कारण गांवों और कस्बों के CSC सेंटरों पर अचानक भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि पेंशनधारकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार जीवन प्रमाणीकरण एक सतत प्रक्रिया है और इसके लिए कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं की गई है।
सभी लाभार्थी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय CSC सेंटर पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल देर होने की वजह से किसी की पेंशन नहीं रोकी जाएगी।
इसके साथ ही विभाग ने CSC संचालकों को निर्देश दिया है कि वे बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार करें और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सेवा दें। भीड़ कम करने के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंचे और अनावश्यक अफरा-तफरी न मचे।
कुल मिलाकर, 'हम जिंदा हैं' साबित करने के लिए लगी यह भीड़ प्रशासन के लिए चेतावनी भी है और सबक भी कि योजनाओं से जुड़ी सही जानकारी समय पर आम लोगों तक पहुंचाना कितना जरूरी है।

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