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    केंद्र सरकार की वजह से बिहार में अटका व‍िकास; 3350 करोड़ से अधिक बकाया, क्‍यों नहीं हो रहा भुगतान?

    By Raman Shukla Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 08:21 PM (IST)

    Bihar News: केंद्र सरकार पर बिहार के मनरेगा सामग्री मद के 3350 करोड़ रुपये से अधिक बकाया हैं, जिससे राज्य में ग्रामीण विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। वित्त ...और पढ़ें

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    मनरेगा में केंद्र सरकार के पास बिहार का काफी बकाया। सांकेत‍िक तस्‍वीर

    राज्य ब्यूरो, पटना। केंद्र सरकार ने योजना के नाम में तो बदलाव कर दिया लेकिन मनरेगा सामग्री मद में बिहार के बकाया भुगतान को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है।

    बिहार का केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) का चालू वित्तीय वर्ष का छह सौ करोड़ रुपये से अधिक भुगतान लंबित है।

    वित्तीय वर्ष 2023-24 का 620 करोड़ एवं जबकि 2024-25 बकाया है 21 सौ करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान अटका रहने के कारण ग्रामीण विकास से जुड़ी कई योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और पंचायत स्तर पर कामकाज की रफ्तार धीमी पड़ी है।

    भुगतान में हो रही कठ‍िनाई

    मनरेगा में दो प्रमुख मद होते हैं। मजदूरी और सामग्री। मजदूरी का भुगतान सीधे लाभार्थियों के खातों में होता है, जबकि सामग्री मद में सड़क, नाला, तालाब, मिट्टी भराई, पुल-पुलिया, भवन मरम्मत जैसे स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर खर्च किया जाता है।

    बिहार सरकार का दावा है कि मजदूरी मद का भुगतान अपेक्षाकृत समय पर हो जाता है, लेकिन सामग्री मद की राशि केंद्र से समय पर नहीं मिलने के कारण राज्य को संवेदकों, आपूर्तिकर्ताओं और पंचायतों के प्रति भुगतान में कठिनाई हो रही है। 

    ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष दर वित्तीय वर्ष सामग्री मद का बकाया बढ़ता गया है। वर्तमान में यह राशि 33 सौ करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है।

    अधिकारियों का कहना है कि इस बकाया के चलते कई जिलों में कार्य एजेंसियां नए काम लेने से कतरा रही हैं, वहीं पहले से कराए गए कार्यों के भुगतान में देरी से स्थानीय स्तर पर असंतोष भी बढ़ रहा है। 

    गुणवत्‍ता और निरंतरता प्रभावित 

    पंचायती राज प्रतिनिधियों का कहना है कि सामग्री मद का भुगतान नहीं होने से योजनाओं की गुणवत्ता और निरंतरता दोनों प्रभावित हो रही हैं।

    कई पंचायतों में अधूरे कार्य पड़े हैं, क्योंकि सामग्री आपूर्ति के लिए भुगतान की गारंटी नहीं मिल पा रही है। इससे रोजगार सृजन के साथ-साथ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण का उद्देश्य भी कमजोर पड़ रहा है। 

    विदित हो कि इस मुद्दे को लेकर बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कई बार ध्यान आकृष्ट किया है।

    संबंधित मंत्रालय और अधिकारियों को पत्राचार के माध्यम से बकाया राशि शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया गया है। बिहार का तर्क है कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना है और इसमें राज्यों की भूमिका केवल क्रियान्वयन की है, जबकि वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना केंद्र की जिम्मेदारी है। 

    वहीं, जानकारों का मानना है कि यदि सामग्री मद का भुगतान समय पर होता रहे तो बिहार में जल संरक्षण, खेत-तालाब और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को नई गति मिल सकती है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि पलायन पर भी अंकुश लगेगा।