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     Bihar Jeevika Didis Go Digital: सोशल मीडिया से बाज़ार तक, जीविका दीदियां बनेंगी डिजिटल उद्यमी; सरकार ला रही है नया मास्टर प्लान

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 09:21 AM (IST)

    बिहार सरकार जीविका दीदियों के लिए एक महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान ला रही है, जिसके तहत उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य उनके उत्पा ...और पढ़ें

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    जीविका दीदियां बनेंगी डिजिटल उद्यमी

    जागरण संवाददाता, पटना। बिहार में महिला सशक्तीकरण की पहचान बन चुकी जीविका दीदियों के लिए नए साल में सरकार एक महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान लेकर आ रही है। इस योजना के तहत अब जीविका दीदियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके उत्पादों को गांव से शहर और शहर से देश-विदेश तक सीधा बाजार मिल सके। व्हाट्सएप ग्रुप, सोशल मीडिया और अन्य सूचना तकनीक के माध्यमों के जरिए एक मजबूत सूचना तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे उत्पादन, बिक्री और बाजार से जुड़ी हर जानकारी समय पर जीविका दीदियों तक पहुंच सके।

    इस संबंध में ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने समीक्षा बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए।

    शुक्रवार को सचिवालय स्थित विभागीय सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि यदि गांव की एक-एक जीविका दीदी को सूचना तकनीक से जोड़ा जाए, तो उनके उत्पादों को सही दाम और व्यापक बाजार मिल सकता है।

    इससे बिहार में बने उत्पादों की पहुंच न केवल दूसरे राज्यों तक, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी संभव हो सकेगी।

    बैठक में जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    उन्होंने कहा कि अब तक एक करोड़ 56 लाख जीविका दीदियों को रोजगार शुरू करने के लिए सहयोग राशि दी जा चुकी है। रोजगार की प्रगति की समीक्षा के बाद भविष्य में उन्हें दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने की योजना है, ताकि उनका व्यवसाय और अधिक विस्तारित हो सके।

    उन्होंने जीविका समूहों की योजनाओं और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी भी दी।

    प्रधान सचिव पंकज कुमार ने बैठक में जोर देते हुए कहा कि जीविका दीदियों और किसानों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों की पैकेजिंग और परचेजिंग की सुविधा ग्रामीण स्तर पर ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

    इससे उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहेगी और बाजार में उनकी पहचान मजबूत होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ब्लॉक स्तर पर कम से कम एक पैकेजिंग हाउस स्थापित करने की दिशा में ठोस योजना तैयार की जाए।

    बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मुख्यमंत्री आवास योजना, लोहिया स्वच्छ बिहार मिशन, मनरेगा और जल जीवन हरियाली मिशन सहित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

    अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी जानकारी एक-एक बिंदु पर प्रधान सचिव के समक्ष रखी।

    इसके अलावा महिलाओं को डेयरी उद्योग और पशुपालन से जोड़ने, रोजगार के इच्छुक महिलाओं को बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने, मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजन बढ़ाने, जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुआं, पोखर और तालाबों के संरक्षण-संवर्धन, पौधरोपण तथा स्वच्छता कर्मियों के मानदेय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

    अंत में प्रधान सचिव ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए।

    उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर बाजार और पैकेजिंग की सुविधा विकसित कर जीविका दीदियों को सीधे रोजगार और मुनाफे से जोड़ा जाए, ताकि वे सच मायने में डिजिटल उद्यमी बन सकें।