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    बिहार के सरकारी सेवकों को कब मिलेगा आठवें वेतन आयोग का लाभ? जानें फिटमेंट फैक्टर और वेतन वृद्धि का गणित

    By Vikash Chandra Pandey Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Sun, 04 Jan 2026 11:59 PM (IST)

    बिहार के सरकारी सेवकों को आठवें वेतन आयोग का लाभ 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले मिलने की उम्मीद है। वे 1 जनवरी, 2026 से पात्र होंगे, हालांकि रिपोर्ट 202 ...और पढ़ें

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    आठवें वेतन आयोग के फायदे का इंतजार। सांकेत‍िक तस्‍वीर

    राज्य ब्यूरो, पटना। 8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं का लाभ बिहार के सरकारी सेवकों को लोकसभा के अगले चुनाव से पहले मिलने की आशा है, जो 2029 में संभावित है।

    सरकार पर अभी नई नियुक्तियों व उसके लिए होने वाले राजस्व व्यय के प्रबंध का दबाव है। हालांकि, सचिवालय की बतकहियों में इसके गुणा-गणित की गूंज तेज हो गई है।

    सातवें वेतन आयोग की अनुशंसाएं बिहार में एक अप्रैल, 2017 से प्रभावी हुई थीं और उसी के साथ बिहार के सरकारी सेवकों को केंद्र की तर्ज पर ही वेतन-भत्ता आदि मिलने लगा था।

    पहली जनवरी से पात्रता 

    उल्लेखनीय है कि आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं के लाभ के लिए सरकारी सेवक पहली जनवरी, 2026 से पात्र हो जाते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार को आयोग की अनुशंसाएं अभी नहीं मिली हैं। 

    परंपरा के अनुसार, केंद्रीय कर्मियों के लिए एक जनवरी, 2026 से आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाएं प्रभावी हो जाएंगी। हालांकि, इसकी रिपोर्ट 2027 के मध्य से पहले नहीं आने वाली।

    अनुमान है कि उसी समय नए वेतनमानों की घोषणा होगी। बिहार में सरकारी सेवक आतुरता के साथ उसकी प्रतीक्षा कर रहे। 2025 के समापन के साथ सातवें वेतन आयोग की समय-सीमा पूरी हो चुकी है।

    बिहार में इसका लाभ लगभग 3.5 सरकारी सेवकों के साथ चार लाख पेंशनभोगियों को भी मिला था। सरकारी सेवकों की इस संख्या में अब काफी वृद्धि हो चुकी है।

    ऐसे में आठवें वेतन आयोग से खजाने पर बोझ भी अपेक्षाकृत अधिक बढ़ेगा। हालांकि, राज्य सरकार के लिए अनुशंसाओं को लागू करने की बाध्यता नहीं, लेकिन सातवें वेतन आयोग को प्रभावी बनाने के बाद पैर पीछे खींचने में धर्म-संकट की स्थिति होगी।

    सरकार के बार-बार की मनाही के बावजूद पुरानी पेंशन योजना (OPS) को प्रभावी बनाने के लिए सरकारी सेवक पहले से ही दबाव बनाए हुए हैं।

    केंद्र में आठवें वेतन आयोग की अनुशंसाएं प्रभावी हो जाने के बाद बिहार में वित्त विभाग की ओर से स्क्रीनिंग कमेटी का गठन होगा।

    उसकी रिपोर्ट पर ही राज्य के सरकारी सेवकों व पेंशनभोगियों के लिए वेतन-वृद्धि का निर्णय होगा। राज्यकर्मियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने के लिए पूर्व मुख्य सचिव जीएस कंग की अध्यक्षता में समिति का गठन हुआ था। उसकी रिपोर्ट के आधार पर तब एरियर भी दिया गया था।

    फिटमेंट फैक्टर और गुणा-गणित

    केंद्र में एक जनवरी, 2016 से सातवां वेतन आयोग प्रभावी हुआ था। तब फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। तब इसी गुणक में वेतन-वृद्धि हुई थी।

    फिटमेंंट फैक्टर का यही तात्पर्य होता हे। इस बार इसके दो के आसपास होने की चर्चा है। हालांकि, यह आयोग पर निर्भर करता है कि वह वेतन-वृद्धि के लिए किस फार्मूले की अनुशंसा करता है।

    खजाने पर पड़ा था तगड़ा बोझ

    अभी तक मूल वेतन में महंगाई भत्ता को जोड़ने के बाद बनने वाली राशि पर फिटमेंंट फैक्टर प्रभावी होता रहा है। इस गणित से पिछली बार निचले स्तर के कर्मियों के वेतन में अप्रत्याशित वृद्धि हुई थी।

    बिहार में सेवारत कर्मियों के वेतन में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। उसी अनुपात में पेंशनभोगियों को भी लाभ मिला था। इससे राज्य के खजाने पर प्रतिवर्ष लगभग 8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा था।

    एरियर और टैक्स का गणित

    एरियर टैक्स के दायरे में आता है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद कई सरकारी कर्मचारी 30 प्रतिशत के आयकर स्लैब के दायरे में आ जाएंगे। उन्हें एरियर पर भी उसी दर से टैक्स देना होगा।

    • बिहार में एक अप्रैल, 2017 से मिल रहा सातवें वेतन आयोग का लाभ
    • 8000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खजाने पर बढ़ा था बोझ, सातवें वेतन आयोग के कारण
    • 2.57 फिटमेंट फैक्टर था तब, इस बार इसके दो के आसपास होने का है अनुमान

    हिसाब जोड़ने पर बल्ले-बल्ले

    सरकारी सेवकों व पेंशनभोगियों को इसी माह महंगाई भत्ता का लाभ मिलना है। वित्त विशेषज्ञों का आकलन है कि आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट मिलने तक महंगाई भत्ता 70 प्रतिशत के आसपास हो सकती है। नए वेतनमान के निर्धारण के समय यह मूल वेतन में जुड़ जाएगी। फिर तो बल्ले-बल्ले है।