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    बिहार विधानसभा सत्र:दो दिनों के शोर-शराबे से दुखी विस अध्यक्ष नन्द किशोर यादव बुधवार को नजर आए पूरे सख्त

    Updated: Wed, 23 Jul 2025 04:21 PM (IST)

    दो दिनों के हंगामें और शोर-शराबे से दुखी विधानसभा अध्यक्ष नन्द किशोर यादव बुधवार को पूरे सख्त नजर आए। उन्होंने राजद विधायक भाई वीरेंद्र को फटकार लगाई ...और पढ़ें

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    दो दिनों के शोर-शराबे से दुखी विस अध्यक्ष नन्द किशोर यादव बुधवार को पूरे सख्त नजर आए

    राज्य ब्यूरो,पटना। दो दिनों के हंगामें और शोर-शराबे से दुखी विधानसभा अध्यक्ष नन्द किशोर यादव बुधवार को पूरे सख्त नजर आए। उन्होंने राजद विधायक भाई वीरेंद्र को फटकार लगाई तो उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा को भी अकारण न बोलने से रोक दिया। आसन पर बैठते ही उन्होंने मंगलवार को सदन में हुई धक्का-मुक्की की घटना पर अप्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि उस धक्का-मुक्की में विधानसभा के कुछ कर्मचारियों को भी चोट लगी।उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण माहौल में अपनी बात रखें।

    हम सबको अवसर देने के लिए तैयार हैं। उनके आग्रह के बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव गहन मतदाता पुनरीक्षण के विरोध में बोलने लगे। उस समय राजद के कुछ सदस्य भी टिप्पणी कर रहे थे। शोर-शराबा के दौरान ही राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कह दिया कि यह सदन किसी के बाप की नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष तेजस्वी से बोले कि वे इस आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए अपने विधायक को माफी मांगने के लिए कहें। वे सदन में खेद प्रकट करें। खेद प्रकट करने से कोई छोटा नहीं हो जाता है। विजय सिन्हा ने भी आपत्ति की। इसपर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें टोका। अध्यक्ष ने कहा कि अगर भाई वीरेंद्र माफी नहीं मांगते हैं तो सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी।

    तेजस्वी यादव भी विजय सिन्हा के बोलने का विरोध कर रहे थे। भाई वीरेंद्र ने न माफी मांगी, न खेद प्रकट किया। नतीजा: प्रश्नोत्तर काल की दो घंटे के लिए निर्धारित कार्यवाही 20 मिनट में स्थगित हो गई। विधानसभा की दूसरी पाली में भी अध्यक्ष ने कड़ा रूख अपनाया। मतदाता पुनरीक्षण के मुद्दे पर विपक्षी सदस्य सदन के बीच में आ गए थे। उनके आने से पहले विधानसभा के सुरक्षाकर्मियों ने रिपार्टर्स टेबुल को अपने कब्जे में ले लिया। कुछ देर नारेबाजी करने के बाद विपक्षी सदस्य सदन का वहिर्गमण बाहर निकल गए।

    दूसरी पाली में सरकार की ओर से पेश सभी छह विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गए। सदन में सिर्फ सत्तारूढ़ दल के सदस्य रह गए थे। श्रम मंत्री संतोष कुमार सिंह विधेयकाें के पक्ष में ध्वनिमत के समय अन्य सदस्यों की तरह हां बोल रहे थे। नन्द किशोर यादव ने उन्हें रोका-आप विधेयक के पक्ष में हां नहीं बोलें। क्योंकि आप विधानसभा के नहीं, विधान परिषद के सदस्य हैं। परिषद के सदस्यों को इस सदन में वोट देने का अधिकार नहीं है।