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    नीतीश सरकार की सख्‍ती का असर; 116 ने कहा-हम शुरू करेंगे उद्योग, 49 वापस करेंगे जमीन, क्‍या है मामला?

    By Bhuwaneshwar Vatsyayan Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Sat, 03 Jan 2026 06:39 PM (IST)

    नीतीश सरकार की सख्ती के बाद बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला है। 116 उद्यमियों ने बियाडा से मिली जमीन पर उद्योग लगाने की प्रतिबद्धता जताई है, ज ...और पढ़ें

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    बियाडा की जमीन लेने वालों को उद्योग शुरू करने का निर्देश।

    राज्य ब्यूरो, पटना। उद्योगों की स्थापना को ले बन रहे माहौल के बीच बड़ा मुद्दा जमीन की उपलब्धता है। सरकार प्राय: सभी जिलाें में नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी में है।

    इसके साथ ही सभी औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में वैसी जमीन का बड़ा रकबा उपलब्ध है जो काफी पहले उद्योग लगाने के नाम पर लिया गया पर उस पर कुछ काम नहीं हुआ।

    जब सरकार ने यह सख्ती की कि जमीन पर उद्योग लगाएं या फिर जमीन को वापस लौटाएं। इस सख्ती के बाद अब 49 उद्यमियों ने बियाडा काे यह लिखित उपलब्ध कराया है कि वे उद्योग नहीं लगाने की स्थिति में हैं।

    वह अपनी जमीन वापस करना चाहते हैं। वही 116 उद्यमियों ने इस सख्ती के बाद कहा है कि वे बिया़डा से मिली जमीन पर उद्योग लगाना चाहते हैं। अब दो महीने के भीतर इस मामले में अंतिम निर्णय होना है।

    अधिकतम 24 महीने के अंदर व्यावसायिक उत्पादन आरंभ करना होगा

    जिन 116 उद्यमियों ने उद्योग विभाग को यह कहा है कि वे बियाडा की जमीन पर उद्योग लगाने को इच्छुक हैं उन्हें इस शर्त के साथ अनुमति है कि 24 महीने के अंदर उन्हें बियाडा की जमीन पर अपनी इकाई स्थापित कर व्यावसायिक उत्पादन को आरंभ करना होगा।

    इसके तहत तीन श्रेणी बनायी गयी है। पहला श्रेणी माइक्रो यूनिट का है। इसके तहत बियाडा ने यह प्रविधान किया है कि इन्हें नौ महीने के अंदर ट्रायल उत्पादन आरंभ करना होगा। 

    इसके साथ ही 12 महीने के अंदर व्यावसायिक उत्पादन में आ जाना होगा। निवेश की सीमा कम से कम एक करोड़ तक होनी चाहिए।

    वहीं लघु उद्योगों को 12 महीने के भीतर अपना ट्रायल उत्पादन आरंभ करना होगा। इस श्रेणी के उद्योगों को 18 महीने के अंदर व्यावसायिक उत्पादन में आ जाना होगा। इन्हें न्यूनतम एक करोड़ से 10 करोड़ तक निवेश करना होगा।

    इसी तरह मध्यम एवं वृहत श्रेणी के उद्योगों को 19 महीने के अंदर ट्रायल उत्पादन कर लेना होगा और 24 महीने में व्यावसायिक उत्पादन में आ जाना होगा।

    अधिकतम 50 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। सभी यूनिटों को बियाडा के सभी तरह के शुल्क को चुकाना होगा। इसके बाद ही उन्हें बियाडा की जमीन पर औद्योगिक इकाई की स्थापना को अनुमति मिलेगी।