फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया को मिला अनुभवी नेतृत्व, अभय सिन्हा अध्यक्ष नियुक्त
अभय सिन्हा को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि निशांत उज्ज्वल उपाध्यक्ष बने हैं। यह भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक मह ...और पढ़ें

अभय सिन्हा अध्यक्ष नियुक्त
जागरण संवाददाता, पटना। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए यह क्षण गर्व और उत्साह से भरा हुआ है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के अध्यक्ष पद पर अभय सिन्हा के चयन से सिने जगत में खुशी की लहर है। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के अध्यक्ष के रूप में पहले ही मजबूत पहचान बना चुके अभय सिन्हा को देश की सबसे प्रभावशाली फिल्म संस्था की कमान सौंपी गई है। यह चयन भारतीय सिनेमा के प्रति उनके दीर्घकालिक योगदान, दूरदर्शी सोच और सशक्त नेतृत्व क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है। वहीं, FFI के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निशांत उज्ज्वल को दी गई है।
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया भारतीय फिल्म उद्योग की शीर्ष संस्था है, जो देशभर के फिल्म निर्माताओं, वितरकों, प्रदर्शकों, स्टूडियो और विभिन्न फिल्म संगठनों का प्रतिनिधित्व करती है।
यह संस्था न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारतीय सिनेमा के हितों की रक्षा और उसके प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाती है।
खास बात यह है कि FFI को अकादमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक फिल्म प्रविष्टि का चयन करने का विशेष अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा यह संस्था वैश्विक फिल्म संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व भी करती है।
अभय सिन्हा का FFI अध्यक्ष बनना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके ठीक पहले उन्हें इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशंस (FIAPF) का उपाध्यक्ष सर्वसम्मति से चुना गया था।
FIAPF विश्व स्तर पर फिल्म प्रोड्यूसर्स की सबसे प्रतिष्ठित संस्था मानी जाती है। इस पद पर उनकी नियुक्ति यह दर्शाती है कि वैश्विक फिल्म समुदाय में भी उनकी साख और नेतृत्व को व्यापक मान्यता मिली है।
इससे भारतीय सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय छवि और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
IMPPA के अध्यक्ष के रूप में अभय सिन्हा ने हमेशा फिल्म निर्माताओं के हितों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कॉपीराइट, थिएटर रेवेन्यू, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई।
उनके नेतृत्व में भारतीय सिनेमा को कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान मिली और विदेशी फिल्म संस्थाओं के साथ सहयोग के रास्ते खुले। यही कारण है कि उनके FFI अध्यक्ष बनने से फिल्म उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
वहीं, निशांत उज्ज्वल का FFI उपाध्यक्ष चुना जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह IMPPA की कार्यकारिणी समिति के सक्रिय सदस्य रहे हैं और संगठनात्मक कार्यों में उनकी भूमिका सराहनीय रही है।
फिल्म उद्योग से जुड़े कई मामलों में उनकी समझ और अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि अभय सिन्हा और निशांत उज्ज्वल की जोड़ी FFI को और अधिक सशक्त बनाएगी।
नए नेतृत्व से यह अपेक्षा की जा रही है कि भारतीय सिनेमा की वैश्विक मौजूदगी और मजबूत होगी, अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण के अवसर बढ़ेंगे और देश की विविध भाषाई व सांस्कृतिक फिल्मों को विश्व मंच पर नई पहचान मिलेगी।
कुल मिलाकर, FFI में यह नेतृत्व परिवर्तन भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक नए और सकारात्मक दौर की शुरुआत माना जा रहा है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।