IAS दीपक के एक लॉकर से मिले 18 लाख के गहने, यहां है मार्केटिंग कांप्लेक्स
आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में विशेष निगरानी इकाई के शिकंजे में फंसे वर्ष 2007 बैच के आइएएस अधिकारी दीपक आनंद एक बैंक लॉकर से 18 लाख के गह ...और पढ़ें
पटना [राज्य ब्यूरो]। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) के शिकंजे में फंसे वर्ष 2007 बैच के आइएएस अधिकारी दीपक आनंद की काली कमाई की दास्तां और लंबी होती जा रही है।
राजधानी के गांधी मैदान स्थित भारतीय स्टेट बैंक में दीपक आनंद के नाम से आवंटित बैंक लॉकर की तलाशी में एसवीयू को 18 लाख, 50 हजार रुपये के स्वर्णाभूषण मिले हैं। जबकि बैंक की इसी शाखा में दीपक आनंद की पत्नी डॉ. शिखा रानी के नाम से भी एक लॉकर आवंटित है, जिसकी तलाशी शुक्रवार को नहीं ली जा सकी। अब इसकी तलाशी बाद में ली जाएगी। एसवीयू ने लॉकर को सील कर दिया है।
सूत्रों की मानें तो दीपक आनंद के परिजनों के नाम पर मुजफ्फरपुर में एक मार्केटिंग कांप्लेक्स होने की सूचना भी है। इस मार्केटिंग कांप्लेक्स से हर महीने बतौर किराया लाखों रुपये आते हैं। दीपक आनंद ने अपनी संपत्ति की घोषणा में इस मार्केटिंग कांप्लेक्स के बारे में कभी कोई उल्लेख नहीं किया है।
उधर, एसवीयू की टीम ने दीपक आनंद की पारिवारिक संपत्ति की जांच भी लगभग पूरी कर ली है। दीपक आनंद के पिता पदम शेखर चौधरी की सीतामढ़ी के गुदरी में शंभु जनरल स्टोर नाम से एक दुकान है। जबकि मां मालती देवी गृहिणी हैं।
इसी तरह, दीपक आनंद की सास व ससुर दोनों झारखंड के गोड्डा में सरकारी स्कूल शिक्षक हैं। एसवीयू की टीम ने दीपक आनंद के पिता पदम शेखर चौधरी की आय की भी जांच की है। पदम शेखर चौधरी ने वर्ष 2009-10 में अपने आयकर रिटर्न में अपनी सालभर की कमाई महज 84 हजार रुपये बताई है। जबकि वर्ष 2010-11 में एक लाख रुपये, वर्ष 2011-12 में एक लाख, 26 हजार रुपये तथा वर्ष 2015-16 में छह लाख बताई है।

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