मुजफ्फरपुर,जासं। प्रशिक्षु दारोगा बीके यादव पुलिस की वर्दी पहनने से पहले मोतिहारी में सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। इस नौकरी को छोड़ कर पुलिस की वर्दी पहनी थी। लेकिन, इनका मंसूबा कुछ और ही था। बताया जाता है कि शिक्षक की नौकरी के दौरान भी इन पर मध्याह्न भोजन में घपलेबाजी करने का आरोप लगा था। चर्चा है कि इस मामले में भी इन पर कार्रवाई हुई थी। विवादों ने इनका पुराना नाता रहा है। वर्दी पहनने के साथ ही इन्होंने सिर्फ अवैध तरीके से रुपये कमाने की तरफ देखा।

चौकीदार पुत्र ने कराई धंधेबाजों से पहचान

बताया जा रहा है कि करजा थाना के चौकीदार उमेश राय का पुत्र रामसेवक राय पर हाल में एक मारपीट का केस दर्ज हुआ था। इस केस के अनुसंधानकर्ता बीके यादव को बनाया गया था। उन्होंने उसे बुलाकर जमानतीय धारा के तहत जमानत दे दी। इसके बाद से दोनों के बीच अच्छे संबंध हो गए थे। कहा जा रहा है कि रामसेवक ने प्रशिक्षु दारोगा का इलाके के कई शराब धंधेबाजों से पहचान भी कराया था। उसी के माध्यम से वे रुपये का लेनदेन भी करने लगे थे। एक सप्ताह पूर्व से वह बीके यादव की निजी वाहन का चालक बनकर साथ में रहने लगा था।

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पूछताछ में वरीय अधिकारियों के समक्ष बनाया बहाना

नगर डीएसपी रामनरेश पासवान समेत अन्य वरीय अधिकारियों ने जब बीके यादव से पूछताछ किया उसने बहाना बनाना शुरू कर दिया। कहा कि उसे सूचना मिली थी कि स्प्रिट लदा ट्रक पहुंचा है। जिसे वह पकडऩे गए थे। लेकिन वरीय अधिकारियों का कहना है कि अगर कार्रवाई करने गए तो साथ में पुलिस फोर्स क्यों नहीं ले गए। इस पर उसने चुप्पी साध ली।  

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वर्दी पहनने के साथ शराब धंधेबाजों से बनाने लगे मधुर संबंध

आरोपित प्रभारी थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर यादव मूल रूप से पूर्वी चंपारण के छौड़ादानो का रहने वाला है। गत साल इसकी तैनाती प्रशिक्षु दारोगा के पद पर सदर थाना में हुई थी, लेकिन करीब पांच माह बीतने के बाद ही भगवानपुर गोलंबर के पास ट्रक चालक से अवैध वसूली करते वीडियो वायरल हो गया। इस पर आइजी और एसएसपी ने संज्ञान लेते हुए उसे तुरंत निलंबित कर दिया था। निलंबन टूटने के बाद करजा थाना में तैनाती की गई थी। 

केस से नाम हटवाने की करते थे सेटिंग 

वर्दी पहनने के साथ इसने शराब धंधेबाजों से मधुर संबंध बनाना शुरू कर दिया। सदर थाना में शराब से संबंधित कई केस दर्ज हुए थे। इसमें से शराब धंधेबाजों का नाम व पता की जानकारी लेकर उसके घर तक पहुंचने लगे। वहां जाकर उक्त धंधेबाज का प्राथमिकी में से नाम हटवाने के लिए कई बार डील भी की थी। कुछ जगहों पर बात बनी तो कहीं से खाली हाथ लौटना पड़ा। इसकी शिकायत तत्कालीन थानाध्यक्ष से लेकर वरीय अधिकारियों तक पहुंची थी। लेकिन, सत्यापन नहीं होने पर सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। 

जमीन के एक मामले में रुपये लेने का लगा था आरोप 

सदर थाना क्षेत्र में ही एक जमीन संबंधित विवादित मामले में भी आरोपित बीके यादव पर रुपये लेनदेन का आरोप लगा था। वहीं एक निर्दोष को जबरन शराब के केस में फंसाने की शिकायत भी वरीय अधिकारियों तक पहुंची थी। इसे लेकर तत्कालीन थानाध्यक्ष और आरोपित के बीच जमकर विवाद भी हुआ था। 

करजा में योगदान देते होने लगे थे चर्चित 

करजा थाना में योगदान देने के साथ ये क्षेत्र के शराब धंधेबाजों का पता लगाने में जुट गए थे। देखते-देखते उन सभी से इनके मधुर संबंध हो गए। चर्चा है कि इलाके के कई शराब धंधेबाजों से डील कर चुके थे। करजा थाना का प्रभार मिलने के साथ ही इन्होंने छोटे-बड़े धंधेबाजों से रेट तय कर लिया था। 

थाना पर आकर दिखाते थे रौब 

अवैध वसूली मामले में निलंबित होने के बाद भी ये कई बार सदर थाना आए थे। निलंबन का अफसोस नहीं था। सभी पुलिसकर्मियों को रौब दिखाते थे। कहते थे कि प्रशिक्षण पूरा होने के साथ ही कहीं न कहीं थानेदारी तो मिल ही जाएगी। काफी ऊपर तक पहुंच और पैरवी है हमारी।

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