मुजफ्फरपुर के जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार 19 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
मुजफ्फरपुर के जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। उन पर संविदा कर्मी संत ...और पढ़ें

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। District Agriculture Officer Arrest: मुजफ्फरपुर में निगरानी विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए संयुक्त निदेशक तिरहुत प्रमंडल सह जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई शुक्रवार सुबह मिठनपुरा स्थित उनके किराए के आवास पर उस समय की गई, जब वे कार्यालय जाने की तैयारी कर रहे थे। निगरानी सूत्रों के अनुसार, सुधीर कुमार पर चयनमुक्त बीटीएम (ब्लॉक टेक्निकल मैनेजर) को दोबारा योगदान कराने के बदले दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।
इस सौदे के तहत पहले ही बड़ी राशि ली जा चुकी थी और शेष 19 हजार रुपये लेते समय निगरानी टीम ने जाल बिछाकर उन्हें दबोच लिया। बताया जा रहा है कि सुधीर कुमार के पास एक साथ तीन महत्वपूर्ण पदों का प्रभार था।
वे संयुक्त निदेशक तिरहुत प्रमंडल के साथ-साथ जिला कृषि पदाधिकारी और परियोजना निदेशक (आत्मा) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। खास बात यह है कि वे 28 फरवरी को सेवानिवृत्त होने वाले थे, इससे पहले हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
11 दिसंबर को दर्ज हुई थी शिकायत
निगरानी विभाग के डीएसपी मिथिलेश कुमार ने बताया कि संतोष कुमार नामक परिवादी ने 11 दिसंबर को निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पुनः नियोजन के बदले उससे दो लाख रुपये मांगे गए।
डीएसपी के अनुसार, परिवादी ने 5 दिसंबर को एक लाख 81 हजार रुपये पहले ही दे दिए थे। इसके बाद बचे 19 हजार रुपये के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी थाना कांड संख्या 3/26 दर्ज किया गया और योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई।
गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने सुधीर कुमार के आवास की तलाशी भी ली। कार्रवाई की खबर मिलते ही जिला कृषि कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निगरानी की टीम आरोपी अधिकारी को अपने साथ पटना लेकर रवाना हो गई।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में मुजफ्फरपुर में यह दूसरी बड़ी निगरानी कार्रवाई है। इससे पहले उद्यान पदाधिकारी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जिससे साफ है कि भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी विभाग की सख्ती बढ़ती जा रही है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।