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    Chandrayaan 4 Mission: चांद से धरती पर मिट्टी लाने की तैयारी में जुटा इसरो, ऑपरेशन डायरेक्टर ने बताया पूरा प्लान

    Updated: Sun, 06 Apr 2025 09:06 AM (IST)

    इसरो का मिशन चंद्रयान 2027-28 तक पूरा होने जा रहा है। इस मिशन के तहत चंद्रमा से मिट्टी का नमूना भारत लाया जाएगा। इसरो के वैज्ञानिक अमिताभ कुमार ने बताया कि चंद्रयान फोर प्रोजेक्ट के तहत यह काम किया जा रहा है। इसे सैंपल रिटर्निंग मिशन का नाम दिया गया है। इसरो ने इसके लिए डाकिंग व अनडाकिंग पर चार महीने में कार्य किया है।

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    Chandrayana 3 के बाद मिशन चंद्रयान 4 में जुटा इसरो

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Chandrayaan 4 Mission: इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक और चंद्रयान टू व थ्री के ऑपरेशन डायरेक्टर अमिताभ कुमार ने कहा कि भारतीय को स्वदेशी अंतरिक्ष यान में बैठाकर चंद्रमा की सतह पर उतारने के लिए सरकार ने 2040 तक का समय निर्धारित किया है। इस अभियान में कई शृंखलाएं जुड़ी हैं।

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    चंद्रमा की सतह से लाया जाएगा मिट्टी का नमूना

    अभी इसरो ने वहां जाने व सतह पर उतरने का प्रयोग किया है। वहां से वापस आने पर प्रयोग होना बाकी है। चंद्रमा की सतह पर उतरकर व्यक्ति वहां से मिट्टी के नमूने प्राप्त कर अपने साथ भारत लाएगा। यह चंद्रयान फोर प्रोजेक्ट है। इसे सैंपल रिटर्निंग मिशन का नाम दिया गया है।

    इस साल इसरो ने हासिल की ये उपलब्धि

    इसरो ने इसके लिए डाकिंग व अनडाकिंग पर चार महीने में कार्य किया है। इस वर्ष की यह इसरो की उपलब्धि है। वह शनिवार को डान बास्को चिल्ड्रन पॉइंट में कार्यक्रम में पहुंचे थे। कहा कि डाकिंग एक्सपेरिमेंट को अभी इसरो ने पृथ्वी की कक्षा में पूरा किया है।

    1200 करोड़ रुपये का बजट

    इसे अब चांद की कक्षा में परीक्षित किया जाना है। इसी प्रक्रिया में चांद की सतह से कुछ मिट्टी के नमूने सैंपल के तौर पर अपने साथ अंतरिक्ष यान लेकर आएगा।

    चंद्रयान फोर पर कार्य चल रहा है। इसे 2027-28 तक पूरा किए जाने की योजना है। इसके लिए करीब 1200 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है।

    केवल गर्व का क्षण मात्र नहीं है चंद्रयान मिशन

    मिशन चंद्रयान भारतीयों के लिए केवल गर्व का ही क्षण नहीं है। इससे हमें चंद्रमा और इसकी सतह के बारे में कई ऐसी जानकारी मिली हैं, जो दुनिया के किसी भी देश के पास उपलब्ध नहीं है। चंद्रमा की सतह पर केवल 10 से 15 सेंटीमीटर जाने पर ही तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज होने लगती है।

    इससे साबित होता है कि चंद्रमा की सतह के नीचे बर्फ या तापमान को कम करने वाली चीज है। इसी तरह दक्षिणी ध्रुव के पास कोई भी देश नहीं गया। भारत इसके करीब पहुंचने वाला पहला देश बना है। ऐसे में साउथ पोल की जानकारी भारत को उपलब्ध हुई है वह पहले की जानकारी से बिल्कुल अलग है।

    चंद्रमा पर भी रहा होगा जीवन

    विज्ञानियों का मानना है कि कभी चंद्रमा पर भी जीवन रहा होगा। ऐसे में वहां क्या ऐसी घटना हुई, जिसके कारण जीवन समाप्त हो गया। क्या ऐसी ही कोई घटना पृथ्वी की सतह पर तो नहीं हो रही है, जिससे हजारों या लाखों वर्ष बाद यहां भी जीवन समाप्त हो जाएगा।

    साथ ही मिशन के दौरान प्राप्त होने वाले साइंटिफिक इनपुट दुनिया के विज्ञानियों को अंतरिक्ष के कई रहस्यों को सुलझाने में सहायता करते हैं। विज्ञानियों ने अपने रिसर्च में पाया है कि चंद्रमा धीरे-धीरे पृथ्वी की सतह से दूर जा रहा है। इसका अर्थ है कि या तो पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण कम हो रहा है या चांद का गुरुत्वाकर्षण बढ़ रहा है।

    ऐसे में इसका धरती व यहां के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा इस पर रिसर्च की जरूरत है। हम जानते हैं चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण ही समुद्र में ज्वार भाटा आते हैं।

    अगर चंद्रमा पृथ्वी से दूर जा रहा है तो यह ज्वार भाटा बनने का पैटर्न बदलेगा। बादल नहीं बनेंगे। बारिश नहीं होगी। सूखा व अकाल पड़ेगा। ऐसे में मानव जीवन की रक्षा और भविष्य के संकटों से बचाने के लिए मिशन चंद्रयान जैसे प्रोजेक्ट की जरूरत है।

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