डिलीवरी के बहाने साइबर ठगी, एक कोड डायल करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता
साइबर यूनिट ने यूएसएसडी कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम को लेकर देशव्यापी एडवाइजरी जारी की है। ठग डिलीवरी एजेंट बनकर *21* जैसे कोड डायल करवाकर मोबाइल कॉल फॉरवर्ड ...और पढ़ें

काल फारवर्डिंग स्कैम को लेकर देशव्यापी एडवाइजरी जारी। प्रतीकात्मक फोटो
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar Crime: कूरियर डिलीवरी के नाम पर साइबर ठगों ने ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है। इसको लेकर साइबर अपराध इकाई ने देशभर के लिए एडवाइजरी जारी की है।
ठग खुद को कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताकर लोगों को फोन करते हैं और पार्सल अटकने या पते में सुधार के नाम पर एक विशेष कोड डायल करने को कहते हैं। जैसे ही व्यक्ति उनके बताए कोड को डायल करता है, उसका मोबाइल नंबर ठग के नियंत्रण में चला जाता है और बैंक खाते से लेकर वाट्सएप तक हैक हो सकता है।
साइबर यूनिट के अनुसार, यह ठगी यूएसएसडी (USSD) कॉल फारवर्डिंग स्कैम के जरिए की जा रही है। इसमें ठग पीड़ित को 21, 61 या 67 जैसे कोड डायल करने के लिए कहते हैं। इन कोड को डायल करते ही मोबाइल की कॉल फारवर्डिंग सक्रिय हो जाती है। इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर आने वाली सभी कॉल, यहां तक कि बैंक और एप से जुड़े ओटीपी कॉल भी सीधे ठग के मोबाइल पर पहुंचने लगते हैं।
कैसे होता है फ्रॉड
ठग फोन कर कहते हैं कि पार्सल डिलीवरी से पहले पते की पुष्टि जरूरी है या पार्सल होल्ड में है। इसके लिए वे एक “प्रोसेस कोड” बताकर डायल करने को कहते हैं। जैसे ही कोड डायल होता है, कॉल फारवर्डिंग एक्टिव हो जाती है और पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगती। इसके बाद ठग बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं और वाट्सएप अकाउंट भी अपने डिवाइस में रजिस्टर कर लेते हैं।
वाट्सएप भी हो सकता हाईजैक
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्कैम में केवल बैंक खाता ही नहीं, बल्कि वाट्सएप अकाउंट भी खतरे में पड़ जाता है। ठग “कॉल मी” विकल्प के जरिए ओटीपी हासिल कर लेते हैं और अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं। इसके बाद वे पीड़ित के रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे की मांग करते हैं।
बचाव के लिए जरूरी सावधानी
साइबर यूनिट ने स्पष्ट किया है कि किसी के कहने पर 21, 61, 67 या इसी तरह के किसी भी कोड को कभी डायल न करें। यदि संदेह हो कि कॉल फारवर्डिंग चालू हो गई है, तो तुरंत ##002# डायल करें, इससे सभी कॉल फारवर्डिंग बंद हो जाती है। किसी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और न ही मैसेज या वाट्सएप पर आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करें। पार्सल की स्थिति हमेशा कूरियर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही जांचें।
ठगी के शिकार हों तो क्या करें
यदि कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

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