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    बिहार में एक और नियुक्ति पर उठे सवाल, कॉमर्स के अनुभव पर अर्थशास्त्र में बहाली!

    By Ajit Kumar Edited By: Ajit kumar
    Updated: Thu, 01 Jan 2026 01:09 PM (IST)

    Bihar University Recruitment News: बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों का बड़ा खेल सामने आया है। मुजफ्फरपुर सहित कई विश्व ...और पढ़ें

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    Assistant Professor Recruitment: विश्वविद्यालय और आयोग की ओर से सपोर्टिंग डाक्यूमेंट मांगे जा रहे हैं। फाइल फोटो 

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar Assistant Professor Recruitment Scam: बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला फर्जी और संदिग्ध शैक्षणिक अनुभव प्रमाण पत्र से जुड़ा है।

    जहां कामर्स (वाणिज्य) के अनुभव के आधार पर अर्थशास्त्र विषय में नियुक्ति कर दी गई। जांच के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई है, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार सुस्त है।

    रेबड़ी की तरह बांटे गए अनुभव प्रमाण पत्र

    जांच में सामने आया है कि कई निजी और अंगीभूत कालेजों ने अनुभव प्रमाण पत्र बिना स्पष्ट नियुक्ति, वेतन या मानदेय के जारी कर दिए। जब विश्वविद्यालय और आयोग की ओर से सपोर्टिंग डाक्यूमेंट मांगे जा रहे हैं, तो अब दावा किया जा रहा है कि संबंधित शिक्षक बगैर वेतन और मानदेय के पढ़ाते थे, इसलिए भुगतान से जुड़े कागजात उपलब्ध नहीं हैं।

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    कामर्स का अनुभव, नियुक्ति अर्थशास्त्र में

    बीआरए बिहार विश्वविद्यालय से जुड़े एक मामले में यह स्पष्ट हुआ है कि अर्थशास्त्र विषय में नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर का शैक्षणिक अनुभव कामर्स का है।

    अभ्यर्थी ने आवेदन के साथ एक निजी कालेज का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया था, जिसमें वाणिज्य विषय पढ़ाने का उल्लेख है। इसके अलावा एक अंगीभूत कालेज में कुछ समय तक गेस्ट टीचर (कामर्स) के रूप में कार्य करने का भी दावा किया गया है।

    इसके बावजूद अर्थशास्त्र विषय में नियुक्ति होने से नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि गठित कमेटी जांच कर रही है और रिपोर्ट आयोग को भेजी जाएगी।

    पांच साल बिना वेतन पढ़ाया

    जय प्रकाश विश्वविद्यालय, सारण के पीएन कॉलेज, परसा से जुड़ा एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला शिक्षक ने दिसंबर 2014 से जनवरी 2019 तक बिना वेतन और मानदेय पढ़ाने का दावा किया है। इसी अनुभव के आधार पर वे अर्थशास्त्र विषय की स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर बनीं।

    उनकी नियुक्ति बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा में हुई है। कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य द्वारा जारी प्रशंसा पत्र में उन्हें “आदर्श शिक्षिका” बताया गया है।

    जांच में सबसे बड़ी बाधा बने कागजात

    बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की बहाली में अनुभव प्रमाण पत्र के नाम पर सबसे अधिक अनियमितता सामने आ रही है। जब जांच टीम नियुक्ति पत्र, उपस्थिति पंजी और वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेज मांग रही है, तो अधिकांश मामलों में यही जवाब मिल रहा है कि “वेतन लिया ही नहीं, तो रिकॉर्ड कहां से दें?”

    बीआरए बिहार विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयों में बगैर वेतन पढ़ाने वालों को अनुभव प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई है।

    जांच कमेटी बनी, लेकिन रिपोर्ट अधूरी

    विश्वविद्यालय में करीब एक महीने से जांच कमेटी गठित है। नवंबर में हुई समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ने 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक केवल कागजात की मांग ही की जा रही है।

    सूत्रों का कहना है कि जैसे ही दस्तावेज सामने आएंगे, नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं, इसी वजह से कागजात जुटाने में आनाकानी हो रही है।