मुंगेर में दाखिल-खारिज के नाम पर फ्रॉड का खुलासा, अंचल अधिकारी ने दर्ज कराई FIR; जांच के आदेश
संग्रामपुर, मुंगेर में जाली दस्तावेजों के आधार पर भूमि के दाखिल-खारिज मामले में अंचल अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराई है। 1996 में फर्जी केवाला दिखाकर स्व. ...और पढ़ें

जाली दस्तावेज के आधार पर भूमि का दाखिल-खारिज। फाइल फोटो
संवाद सहयोगी, संग्रामपुर (मुंगेर)। जाली दस्तावेज के आधार पर भूमि का दाखिल-खारिज कराने के मामले में अंचल अधिकारी ने एक्शन लेते हुए थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। केस दर्ज होते ही आरोपित जालसाज फरार बताया जा रहा है।
यह मामला प्रखंड क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन भी अब ऐसे मामलों को गंभीरता से खंगालने में जुट गया है। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1996 में चंदनियां गांव निवासी स्व. नागेश्वर राम के नाम से भूमि का फर्जी केवाला (विक्रय पत्र) दिखाकर अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया गया था।
उक्त केवाला के सत्यापित प्रति के आधार पर स्व. नागेश्वर राम के नाम से भूमि का दाखिल-खारिज भी कर दिया गया। बाद में इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए और मामला सामने आया। भूमि के प्रतिपक्षी रामवृक्ष भगत ने गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराने का आरोप लगाते हुए भूमि सुधार उपसमाहर्ता, तारापुर के यहां आवेदन देकर अपनी भूमि की सुरक्षा की गुहार लगाई।
मामले की सुनवाई के बाद भूमि सुधार उपसमाहर्ता ने अंचल अधिकारी द्वारा की गई दाखिल-खारिज की कार्रवाई को निरस्त कर दिया। इसके बाद अंचल अधिकारी ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। अंचल अधिकारी निशीथ नंदन ने पत्राचार के माध्यम से जिला निबंधन कार्यालय से संबंधित भूमि के निबंधन दस्तावेज की सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध कराने की मांग की।
जिला निबंधन कार्यालय से प्राप्त जानकारी में स्पष्ट हुआ कि दाखिल-खारिज के लिए प्रस्तुत किया गया केवाला पूरी तरह फर्जी है। इसके बाद अंचल अधिकारी ने जालसाजी के आरोप में स्व. नागेश्वर राम के पुत्र हंसराज राम के विरुद्ध थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।
बताया गया कि भूमि सुधार उपसमाहर्ता के यहां दर्ज मामले की पैरवी स्व. नागेश्वर राम के पुत्र हंसराज राम द्वारा की जा रही थी। जांच में यह सामने आया कि पूरे मामले में प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की गई और अनैतिक तरीके से भूमि पर कब्जा जमाने का प्रयास हुआ।
पुलिस अब मामले की छानबीन में जुट गई है और आरोपित की तलाश की जा रही है। वहीं भूमि के प्रतिवादी रामवृक्ष भगत ने बताया कि विवादित जमीन उनकी पुश्तैनी है, जिस पर वर्षों से उनका दखल-कब्जा है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर दाखिल-खारिज हो जाने से उनकी खेती-बटाईदारी पर भी सवाल खड़े हो गए थे।
उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अंचल अधिकारी ने कहा कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई की गई है। प्रखंड क्षेत्र में इस तरह के अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है, ताकि भूमि से जुड़े फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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