मधुबनी सदर अस्पताल में आई वार्ड के पास पोस्टमार्टम, आंख के मरीजों को संक्रमण का खतरा
मधुबनी सदर अस्पताल में आई वार्ड के पास पोस्टमार्टम हाउस होने से आंख के आपरेशन वाले मरीजों को संक्रमण का खतरा है। पोस्टमार्टम की बदबू और शवों के कारण म ...और पढ़ें

सदर अस्पताल परिसर में आमने सामने आईवार्ड और पोस्टमार्टम हाउस भवन। जागरण
जागरण संवाददाता, मधुबनी। सदर अस्पताल के सबसे संवेदनशील आंख, कान और गला विभाग के समक्ष पोस्टमार्टम हाउस रहने से ऑपरेशन वाले मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। पोस्टमार्टम के दौरान निकलने वाली बदबू से संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है।
आई वार्ड में सप्ताह में तीन दिन मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन होता है। जिस वजह से ओपीडी और ऑपरेशन के बाद भर्ती रहने वाले मरीज और परिजन बेहाल रहते हैं। शव का पोस्टमार्टम कराने आये परिजन भी कई बार आई वार्ड में लगी कुर्सियों पर घंटों बिताते हैं। उसी दौरान आंख का इलाज और ऑपरेशन भी चलता है।
ओटी में ऑपरेशन के बाद मरीजों को वार्ड में भर्ती रखा जाता है। पोस्टमार्टम हाउस से निकलने वाली बदबू से तो परेशानी होती ही है। पूरे दिन शव के पोस्टमार्टम में आने और उसके परिजनों के चीख- चित्कार के बाद दहशत से ऑपरेशन वाले मरीज भी शाम को अपने- अपने घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
वार्ड से पोस्टमार्टम हाउस की महज 40 से 50 फीट की दूरी रहने की वजह से ऑपरेशन वाले मरीजों की आंख में संक्रमण फैलने का डर बना रहता है। कई बार अज्ञात शवों को 72 घंटे तक रखा जाता है। जिससे निकलने वाली बदबू मरीज व परिजनों की परेशानी बढ़ा देता है।
शनिवार को अपने परिजन को आंख का ऑपरेशन के बाद डॉक्टर से दिखने आई कविता देवी बताती हैं कि यहां लाश को देखकर अंदर से डर पैदा हो जाता है। रात में यहां रहना मुश्किल रहता है।
वह आज दूसरे दिन यहां अपने परिजन को लेकर पहुंची हैं। शिवचंद्र मंडल ने बताया कि सबसे संवेदनशील यूनिट के सामने ही पोस्टमार्टम कराया जाता है जिस वजह से हेल्थ हाइजीन का कोई ख्याल नहीं रहता है। सप्ताह में सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार को मोतियाबिंद का ऑपरेशन चलता है इसके अलावा सात दिन आंख व अन्य विभाग की ओपीडी चलती है।
आई वार्ड में मौजूद सिमरन, शोभा देवी, गोपाल कुमार, प्रवीण ठाकुर आदि ने बताया कि पहले पोस्टमार्टम हाउस अस्पताल परिसर से बाहर था।
वहां पर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को लाश सौंप दी जाती थी, किसी तरह के संक्रमण को कोई खतरा नहीं था, पर अस्पताल परिसर के संवेदनशील यूनिट के बगल में पोस्टमार्टम हाउस रहने से मरीज, परिजन से लेकर डॉक्टर और पारामेडिकल कर्मियों को परेशानी होती है।
डॉक्टर और कर्मियों को हो रही दिक्कत
आईवार्ड में तैनात डॉक्टरों को भी पोस्टमार्टम हाउस की वजह से दिक्कत होती है। कई बार अस्पताल प्रशासन से यहां से पोस्टमार्टम हाउस को कहीं अन्य जगह पर शि़फ्ट करने की गुहार लगा चुके हैं। उधर, उसके बगल में एएनएम स्कूल की छात्राओं को भी दिक्कत होती है। वहीं बगल में फीजियोथेरेपी सेंटर में आने वाले मरीजों को भी बदबू झेलने की विवशता है। आई वार्ड और फीजियोथेरेपी और कान व गला विभाग में प्रतिदिन करीब 75 से 100 तक मरीज पहुंचते हैं।
सदर अस्पताल परिसर में कई नए भवनों का निर्माण हो रहा है जिस वजह से कई चीजें इधर से उधर है। इन भवनों के निर्माण हो जाने के बाद पोस्टमार्टम हाउस को अस्पताल परिसर के किसी एक कोने में शिफ्ट किया जाएगा। ताकि किसी तरह की परेशानी मरीज और उनके परिजनों को नहीं उठानी पड़े।
डाक्टर हरेंद्र कुमार, सिविल सर्जन, मधुबनी।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।