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    मिट्ठू झा हत्याकांड ने पुराने जख्मों को किया ताजा, कटिहार के कटरिया में फिर सुलग रहा जातीय संघर्ष, खतरे की आहट!

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 05:50 PM (IST)

    कुरसेला चौक पर सागर झा उर्फ मिट्ठू की हत्या से कटिहार के कटरिया गांव में जातीय संघर्ष की आशंका गहरा गई है। मृतक की मां ने सुमित यादव और राजवीर सिंह पर ...और पढ़ें

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    घटनास्थल पर जुटी लोगों की भीड़। (जागरण)

    आशीष सिंह चिंटू, कटिहार। कुरसेला चौक पर कटरिया निवासी सागर झा उर्फ मिट्ठू कुमार झा की हत्या ने इलाके में गंभीर आशंका पैदा कर दी है।

    स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि कहीं कटरिया गांव में एक बार फिर जातीय संघर्ष की चिंगारी तो नहीं सुलग रही। हालांकि, घटना के तुरंत बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन कटरिया का अतीत ऐसे टकरावों से जुड़ा रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    कटरिया गांव में पूर्व में यादव और गोढ़ी (महलदार) के बीच ज्यादातर तथा ब्राह्मण समुदायों के बीच तनाव और हिंसक झड़पों की कुछ घटनाएं सामने आती रही हैं। हत्या, प्रतिशोध और आपराधिक टकराव का यह सिलसिला गांव के इतिहास में दर्ज है।

    ताजा मामले में मृतक मिट्ठू की मां ने गांव के ही सुमित यादव के साथ राजवीर सिंह पर हत्या का आरोप लगाया है। इसमें सुमित यादव पूर्व मुखिया नेपाली यादव का पुत्र है। बताया जाता है कि वर्ष 2012 में पूर्व मुखिया नेपाली यादव की भी कुरसेला चौक पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

    सुमित यादव का नाम भी पूर्व में आपराधिक गतिविधियों से जुड़ता रहा है। वहीं, मृतक मिट्ठू का उठना-बैठना गोढ़ी जाति के एक दबंग व्यक्ति के साथ बताया जा रहा है, जिससे मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं जन्म ले रही हैं।

    जानकार बताते हैं कि करीब 20 वर्ष पूर्व दो भाई ज्योतिन झा और वीरेंद्र झा उर्फ वीरू झा के बीच भूमि विवाद हुआ था, जिसने बाद में खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। वीरू झा की हत्या के आरोप तत्कालीन मुखिया नेपाली यादव पर लगे थे। इसके बाद पेशेवर अपराधियों द्वारा ज्योतिन झा की भी हत्या कर दी गई।

    कुछ वर्षों बाद नेपाली यादव की भी कुरसेला चौक पर हत्या हो गई, जिसमें गांव के ही पूर्व मुखिया बबलू सिंह की गिरफ्तारी हुई थी। इसके अलावा, आर्म्स एक्ट के एक मामले में वीरू झा के भाई अरुण झा की गिरफ्तारी के बाद नेपाली यादव की हत्या में उनकी संलिप्तता भी उजागर हुई थी।

    कटरिया में अपराध की प्रवृत्ति इस कदर हावी रही है कि गांव में हमेशा एक अनजाना भय व्याप्त रहता है। शाम ढलने के बाद बाहरी लोग गांव में जाने से कतराते हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते तीन वर्षों से काली पूजा के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन बंद है।

    कानून व्यवस्था पर फिर खड़े हुए सवाल

    तीन वर्ष पूर्व ऐसे ही एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान गोली मारकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। मिट्ठू झा की हत्या ने एक बार फिर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि क्या यह मामला व्यक्तिगत रंजिश तक सीमित है या इसके पीछे किसी बड़े जातीय संघर्ष की पटकथा लिखी जा रही है।