कटिहार। हसनगंज प्रखंड क्षेत्र में हरे चारे की कमी को दूर करने को लेकर जीविका दीदियों का प्रयास रंग लाने लगा है। पशुचारे का बेहतर विकल्प अजोला की खेती अब रफ्तार पकड़ने लगी है।

बता दें कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से अजोला की खेती को लेकर पूर्व में जीविका दीदियों को प्रशिक्षण मिला था। बाद में इसकी बीज भी केन्द्र से ही मुहैया कराई गई थी। यह हरा पशुचारा के साथ उर्वरक के रुप में भी उपयोग में लाया जाता है। 21 दिनों में तैयार होने वाला अजोला पशुओं को भी खूब पसंद आ रहा है। खासकर दुधारु पशुओं के लिए यह काफी लाभकारी होता है। जीविका के प्रखंड परियोजना पदाधिकारी हिमांशु शेखर ने बताया कि जिस तरह सिमटती जंगल व बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हरे चारे की कमी हो रही है, इससे पशुपालकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। अगर अजोला की खेती की जाए तो पशुपालकों को हरा चारा की समस्याओं से निजात मिल सकती है। अजोला कम जगह व खर्च में 21 दिनों में पानी की सतह पर तैयार होने वाला अपुष्पक पौधा है। जो गाय,भैंस,बकरी,मुर्गा-मुर्गी आदि के लिए पौष्टिक पशु आहार के साथ जैविक खाद के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है। प्रखंड क्षेत्र में 30 जीविका दीदियों ने इसकी खेती शुरु की है।