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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bihar: अब उज्ज्वला दीदी बन गैस एजेंसी का संचालन करेंगी जीविका की महिलाएं, 1.23 लाख में शुरू किया काम

Published: Fri, 13 Jun 2025 05:37 PM (IST)

कैमूर जिले में जीविका दीदियां अब गैस एजेंसी चलाएंगी। सुरसतिया और पचरतनी दीदी ने मिनी गैस वितरण केंद्र शुरू किए ...और पढ़ें

अब उज्ज्वला दीदी बन गैस एजेंसी का संचालन करेंगी जीविका की महिलाएं (जागरण)
अब उज्ज्वला दीदी बन गैस एजेंसी का संचालन करेंगी जीविका की महिलाएं (जागरण)

HighLights

  1. जीविका दीदियां अब चलाएंगी गैस एजेंसी
  2. उज्ज्वला योजना से बढ़ेगा महिला सशक्तिकरण
  3. ग्रामीणों को गांव में मिलेगा गैस कनेक्शन

जागरण संवाददाता, भभुआ।  जिले में जीविका दीदी अब गैस एजेंसी का संचालन करेंगी। सदर प्रखंड की सोनहन पंचायत के ग्राम सोनहन निवासी सुरसतिया दीदी ने शुक्रवार को बीपीसीएल के मिनी गैस वितरण केंद्र की शुरूआत की। सुरसतिया दीदी को जीविका की तरफ से यह कार्य शुरू करने के लिए एक लाख 23 हजार 400 रुपये प्राप्त हुए हैं।

इसके साथ ही जागेबरांव पंचायत के ग्राम कुकुढ़ी निवासी पचरतनी दीदी ने भी बीपीसीएल के मिनी गैस वितरण केंद्र को शुरू किया है। इन्हें यह कार्य शुरू करने के लिए जीविका की तरफ से एक लाख चार सौ रुपये प्राप्त हुए हैं।

बता दें कि जीविका ने एक नए कार्य की शुरुआत की है। जिसके तहत सतत जीविकोपार्जन योजना अंतर्गत चयनित लाभार्थियों से उनके इच्छा एवं जरूरत अनुसार अब गैस वितरण केंद्र की शुरुआत कराई जाएगी। इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जीविका और बीपीसीएल ने आपसी सहमति बनाई है।

जो दीदियां गैस वितरण केंद्र चलाएंगी उन्हें उज्ज्वला दीदी बोला जाएगा एवं इस योजना का नाम इस कारण से जीविका की उज्ज्वला योजना है। इस योजना से निर्धन महिलाओं का जीविकोपार्जन बढ़ेगा। साथ ही ग्रामीणों को अपने गांव में ही गैस कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।

बता दें कि जिले के अस्पतालों एवं अजा व अजजा विद्यालयों में रसोई संचालन, नर्सरी, पुस्तकालय एवं दीदी अधिकार केंद्र आदि का संचालन जीविका दीदियों के माध्यम से हो रहा है। इससे जिले में महिलाएं सशक्त हो रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं।

जीविका दीदियों के लगातार उन्नत की राह पर आगे बढ़ने के चलते अन्य महिलाएं भी जीविका से जुड़ रही हैं। जिन्हें रोजगार के लिए जीविका की ओर से मदद की जा रही है। इससे अब सुदूरवर्ती गांव की महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है और वह रोजगार कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही है। इससे वे अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करने में सहयोग कर रही हैं।