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    मालगाड़ी हादसा : प्राथमिक रिपोर्ट पर मतभेद, साजिश या ट्रैक फेलियर, जांच जारी

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 05:00 AM (IST)

    सिमुलतला में 27 दिसंबर की रात हुए मालगाड़ी हादसे की प्राथमिक रिपोर्ट में मतभेद सामने आए हैं। तकनीकी अधिकारियों ने इसे रेल फ्रैक्चर बताया है, जबकि सीनि ...और पढ़ें

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    बिहार के जमुई जिले में हुआ था हादसा।

    संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। लाहाबन और सिमुलतला स्टेशन के बीच 27 दिसंबर की रात हुए मालगाड़ी हादसे को लेकर रेलवे के भीतर मतभेद सामने आ गए हैं। घटनास्थल से तैयार प्राथमिक रिपोर्ट (ज्वाइंट नोट) ने नई बहस छेड़ दी है। जहां तकनीकी और सुरक्षा अधिकारियों ने हादसे का कारण रेल फ्रैक्चर (पटरी टूटना) बताया है, वहीं सीनियर सेक्शन इंजीनियर (पीवे) ने इस पर असहमति जताते हुए घटना को शरारती तत्वों कीसाजिश करार दिया है। हालांकि, यह ज्वाइंट नोट अंतिम निष्कर्ष नहीं है, बल्कि घटनास्थल का प्रारंभिक आकलन मात्र है। मामले की गहन जांच के लिए मुख्यालय स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है, जिसकी रिपोर्ट आना शेष है।

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    जिस जगह 10 माह पूर्व खुली थी फिश प्लेट, वहीं हुआ हादसा, जांच में विरोधाभास

    संयुक्त नोट में तकनीकी विभाग ने कहा है कि हादसा अप मेन लाइन की बाईं पटरी टूटने से हुआ। टूटी हुई पटरी पर काला धब्बा पाया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि वेल्डिंग की पुरानी गर्मी या मैटेरियल फेलियर के कारण पटरी अंदर ही अंदर कमजोर हो गई थी। इसके विपरीत, सीनियर सेक्शन इंजीनियर (पीवे) ने अपने नोट में दावा किया है कि इंजन के काउ कैचर पर किसी बाहरी धातु से टकराने के स्पष्ट निशान मिले हैं। उनका कहना है कि इंजन किसी ठोस अवरोध से टकराया, जिससे पटरी टूटी और हादसा हुआ।

    ज्वाइंट नोट अंतिम निष्कर्ष नहीं है, बल्कि घटनास्थल का प्रारंभिक आकलन मात्र

    आरपीएफ रिपोर्ट में लोको पायलट द्वारा किसी अवरोध या संदिग्ध गतिविधि से इन्कार किया गया है, लेकिन इंजीनियर ने लोको पायलट के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि दुर्घटना के वक्त पायलट को जर्क विद जंप (उछाल के साथ झटका) महसूस हुआ था। इंजीनियर के अनुसार, ऐसा तभी संभव है जब पहिया किसी ठोस वस्तु पर चढ़ा हो। उन्होंने आशंका जताई है कि फिश प्लेट खोली गई थी या ट्रैक पर जान-बूझकर कोई वस्तु रखी गई थी। आसानसोल रेल मंडल के पीआरओ ने ज्वाइंट नोट पर कुछ भी बोलने से इन्कार किया। कहा, वरीय अधिकारियों के नेतृत्व में जांच चल रही है, जल्द ही कारण स्पष्ट हो जाएगा।

    पहले भी मिल चुकी है फिश प्लेट खुली

    जांच दस्तावेज में यह भी स्वीकार किया गया है कि 24 फरवरी 2025 को इसी स्थान (किमी 344/15-17) पर नाइट पेट्रोलमैन ने फिश प्लेट खुली हुई पाई थी, जिस पर पीडब्ल्यूआइ की शिकायत के बाद मामला दर्ज हुआ था। इंजीनियर ने सवाल उठाया है कि जिस स्थान पर पहले भी ऐसी घटना हुई, वहीं दोबारा हादसा होना महज संयोग नहीं हो सकता। उन्होंने इस क्षेत्र को सबोटाज-प्रोन घोषित करने की मांग की है। इधर, ड्यूटी पर तैनात पेट्रोलमैन रजनीश राज और निरंजन कुमार ने बताया कि ट्रेन गुजरते ही तेज आवाज आई और टेलवा हाल्ट प्लेटफार्म की लाइट फ्लक्चुएट करने लगी। उन्हें पहले बिजली के तार गिरने का अंदेशा हुआ, लेकिन मौके पर पहुंचने पर देखा कि इंजन आगे निकल चुका है और पीछे की बोगियां पुल से नीचे गिर चुकी हैं।

    यूएसएफडी जांच पर भी सवाल

    रेलवे का दावा है कि अक्टूबर और नवंबर 2025 में हुई अल्ट्रासोनिक जांच (यूएसएफडी) में ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित पाया गया था। इसी को लेकर इंजीनियर ने सवाल उठाया है कि यदि हालिया जांच में सब कुछ ठीक था तो अचानक पटरी का कई टुकड़ों में टूटना और ब्लैक स्पोट मिलना संदेह पैदा करता है। उनका आरोप है कि अन्य विभाग अपनी खामियां छिपाने के लिए ट्रैक विभाग को दोषी ठहरा रहे हैं। अब सबकी निगाहें उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं जो यह तय करेगी कि यह हादसा तकनीकी खामी का नतीजा था या फिर किसी साजिश का परिणाम।

     

    उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित

     

    रेलवे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। कमेटी में अध्यक्ष के रूप में प्रधान मुख्य सुरक्षा अधिकारी (पीसीएसओ) शामिल हैं, वहीं सदस्य के रूप में मुख्य ट्रैक अभियंता (सीटीई), चीफ रोलिंग स्टाक इंजीनियर (मैकेनिकल) तथा मुख्य विद्युत लोकोमोटिव अभियंता (सीईएलई) शामिल हैं।


    घटनाक्रम एक नजर में

    • 24 फरवरी 2025 (साजिश की पहली दस्तक): इसी स्थान (किमी 344/15-17) पर फिश प्लेट खुली मिली थी। आरपीएफ में केस (609/25) दर्ज, पर कोई गिरफ्तारी नहीं
    • 27 अक्टूबर व 11 नवंबर 2025 : ट्रैक की अल्ट्रासोनिक जांच, रिपोर्ट में सब ठीक मिला
    • 27 दिसंबर 2025 (हादसे वाली रात) 10:46 बजे : आखिरी अप ट्रेन सुरक्षित गुजरी
    • 11:02 बजे : आखिरी डाउन ट्रेन सुरक्षित गुजरी
    • 11:08 बजे : मालगाड़ी गुजरी, लोको पायलट को जोरदार झटका लगा, नौ बोगियां पुल से नीचे गिरीं
    • 11:26 बजे : पेट्रोलमैन रजनीश राज मौके पर पहुंचे और सूचना दी

     

    विरोधाभाषी ज्वाइंट नोट पर इनके हैं हस्ताक्षर 

    • शिव शंकर सिंह (आरपीएफ इंस्पेक्टर), सुरक्षा विभाग : साजिश से इन्कार
    • ओम प्रकाश शर्मा (एसएसई), इंजीनियरिंग विभाग : तकनीकी कारण या पटरी फ्रैक्चर

     

    असहमति नोट

    • विश्वजीत दास (एसएसइ /पी.वे/जसीडीह) ने जताई साजिश की आशंका
    • साक्षी : पेट्रोलिंग स्टाफ महेंद्र कुमार, निरंजन यादव, रजनीश राज, निरंजन कुमार

     

    जांच का जिम्मा : इन चार सुप्रीम अधिकारियों के हाथ में है फैसले की कमान

    सिमुलतला रेल हादसे की गुत्थी सुलझाने के लिए रेलवे ने जिन चार शीर्ष अधिकारियों की उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है, वे जोन के तकनीकी और सुरक्षा मामलों के सर्वोच्च विशेषज्ञ माने जाते हैं। घटनास्थल से तैयार ज्वाइंट नोट में उठे विवाद, रेल फ्रैक्चर या साजिश का अंतिम फैसला इसी कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।


    1. प्रधान मुख्य सुरक्षा अधिकारी (पीसीएसओ): अध्यक्ष
    भूमिका : रेलवे में सुरक्षा मानकों के सर्वोच्च अधिकारी और कमेटी के अध्यक्ष
    क्या जांचेंगे : यह तय करेंगे कि हादसा सिस्टम फेलियर (मेंटेनेंस या तकनीकी चूक) का परिणाम था या किसी बाहरी हस्तक्षेप व साजिश का। सभी विभागों की रिपोर्ट का समन्वय कर अंतिम निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगे।

    2. मुख्य ट्रैक अभियंता (सीटीई): सदस्य
    भूमिका : रेल पटरियों, स्लीपर और बैलास्ट की तकनीकी स्थिति के प्रमुख विशेषज्
    क्या जांचेंगे : ज्वाइंट नोट में बताए गए ब्लैक स्पाट (पुराना फ्रैक्चर) की वास्तविकता। साथ ही यह भी परखेंगे कि फिश प्लेट से छेड़छाड़ के कोई ठोस सबूत हैं या नहीं।


    3. मुख्य विद्युत लोकोमोटिव अभियंता (सीईएलई): सदस्य
    भूमिका : इलेक्ट्रिक इंजन और लोको पायलट संचालन से जुड़े मामलों के प्रमुख
    क्या जांचेंगे : इंजन के काउ कैचर पर बाहरी वस्तु से टकराने के कथित निशानों की वैज्ञानिक जांच। साथ ही लोको पायलट द्वारा महसूस किए गए जर्क (झटके) के तकनीकी डेटा का विश्लेषण।


    4. चीफ रोलिंग स्टाक इंजीनियर (सीआरएसई): सदस्य
    भूमिका : मालगाड़ी के वैगन, पहिया, एक्सल और ब्रेकिंग सिस्टम के विशेषज्ञ
    क्या जांचेंगे : कहीं किसी वैगन की तकनीकी खराबी, जैसे पहिया जाम होना या एक्सल टूटने से तो बेपटरी की शुरुआत नहीं हुई। यह भी स्पष्ट करेंगे कि दुर्घटना की जड़ ट्रैक में थी या रोलिंग स्टाक में।

    कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सिमुलतला हादसा तकनीकी खामी का नतीजा था या किसी सुनियोजित साजिश का। फिलहाल, सभी की नजरें इन्हीं चार अधिकारियों के निष्कर्ष पर टिकी हैं।

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    रेलवे अधिकारियों ने कहा