पुराने मोबाइल बने बाधा, आंगनबाड़ी सेविकाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग पर संकट
जहानाबाद में आंगनबाड़ी सेविकाएं पुराने 2जी/3जी मोबाइल फोन के कारण ऑनलाइन रिपोर्टिंग में गंभीर समस्याओं का सामना कर रही हैं। नए 4जी/5जी पोर्टलों के साथ ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, जहानाबाद।डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के सरकारी दावों के बीच आंगनबाड़ी केंद्रों में तकनीकी संसाधनों की कमी अब विभागीय कामकाज पर भारी पड़ने लगी है। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत सेविकाएं पुराने और तकनीकी रूप से कमजोर मोबाइल फोन के कारण ऑनलाइन रिपोर्टिंग में गंभीर परेशानियों का सामना कर रही हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए 2जी और 3जी नेटवर्क आधारित मोबाइल फोन आज के समय में लगभग अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।
जिले में कुल 1,278 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन सभी केंद्रों की सेविकाओं को प्रतिदिन बच्चों के पोषण, टीकाकरण, उपस्थिति, गर्भवती और धात्री महिलाओं से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल और एप के माध्यम से भेजनी होती है। सेविकाओं का कहना है कि वर्तमान में विभागीय पोर्टल और मोबाइल एप पूरी तरह 4जी और 5जी नेटवर्क के अनुरूप विकसित किए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें अब भी पुराने मोबाइल से ही काम करना पड़ रहा है। ऐसे में नेटवर्क की समस्या और तकनीकी दिक्कतें आम हो गई हैं।
सेविकाओं के अनुसार कई इलाकों में 2जी और 3जी नेटवर्क लगभग बंद हो चुका है। नेटवर्क मिलने पर भी एप बार-बार हैंग हो जाता है या अचानक बंद हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि भरी गई रिपोर्ट सेव नहीं हो पाती और पूरा डेटा दोबारा भरना पड़ता है। एक सामान्य दैनिक रिपोर्ट भेजने में ही 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लग जाता है, जिससे सेविकाओं का अधिकांश समय मोबाइल के साथ जूझने में बीत जाता है।
आंगनबाड़ी सेविकाओं का कहना है कि ऑनलाइन रिपोर्टिंग का उद्देश्य काम को आसान बनाना था, लेकिन पुराने मोबाइल के कारण यह प्रक्रिया बोझ बनती जा रही है। कई बार नेटवर्क न मिलने के कारण रिपोर्ट समय पर अपलोड नहीं हो पाती, जिससे उच्च स्तर से जवाब-तलब भी किया जाता है। इससे सेविकाओं पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
सेविकाओं ने यह भी बताया कि सरकार और विभाग की ओर से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को नए स्मार्ट मोबाइल उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी, ताकि डिजिटल कार्य सुचारु रूप से किया जा सके। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। न तो नए मोबाइल मिले हैं और न ही पुराने उपकरणों को अपडेट किया गया है।
इस संबंध में आंगनबाड़ी डीपीओ रचना ने बताया कि सेविकाओं को मोबाइल उपलब्ध कराने की बात जरूर की गई थी, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि पुराने मोबाइल से रिपोर्टिंग में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं और इस समस्या से विभाग भी अवगत है।
कुल मिलाकर, यदि समय रहते आंगनबाड़ी केंद्रों को नए और आधुनिक स्मार्ट मोबाइल उपलब्ध नहीं कराए गए, तो डिजिटल रिपोर्टिंग व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता रहेगा और इसका सीधा नुकसान सेविकाओं के कार्य और लाभार्थियों की सेवाओं पर पड़ेगा।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।