भूखे-प्यासे प्रवासियों के लिए मसीहा बन गए मददगार युवा
सुभाष कुमार गया। पारा सातवें आसमान पर और खाने-पीने का इंतजाम भगवान भरोसे। ...और पढ़ें

सुभाष कुमार, गया। पारा सातवें आसमान पर और खाने-पीने का इंतजाम भगवान भरोसे। लंबे सफर की थकान चेहरे पर साफ उभर आ रही। पसीने से लथपथ उन यात्रियों के लिए गया के मददगार युवा किसी मसीहा से कम नहीं। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के रुकते ही यात्रियों को भोजन के पैकेट और पानी के बोतल पकड़ाते हुए वे एक से दूसरी बोगी की ओर बढ़ते जाते हैं। कोशिश हर भूखे-प्यासे को भोजन-पानी मुहैया कराने की है। कोरोना ने सबसे अधिक कहर उन बेबस मजदूरों पर ढाया है, जिन्हें प्रवासी कहा जा रहा। रोजी-रोटी की आस में वे अपने घर से सैकड़ों मील दूर निकल गए थे। उन शहरों में मेहनत की रोटियां तो मिलीं, लेकिन इस बुरे वक्त में दुत्कारे जाने का दर्द भी। अब एक-एक कर वे अपने घर लौट रहे। उन्हें घर पहुंचाने के लिए रेलवे की ओर से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रहीं। इस दौर में उनमें व्यवस्था आदि की शिकायत करने की जहमत कौन उठाए! पप्पू कुमार, मनोज कुमार आदि सूरत से लौट रहे। कुशल-क्षेम पूछिए तो आंखें बेबसी की दास्तां बयां करने लगती हैं। सूरत से दरभंगा जा रहे रंजीत कुमार, अरुण कुमार आदि आवाज को तनिक दबाते हुए बताते हैं कि ट्रेन के डिब्बों में पंखा-बिजली की कौन कहे, पानी तक नहीं। कई घंटों से भूखे-प्यासे हैं। उनके इतना कहने तक करीमगंज के युवाओं की टोली उन तक पहुंच चुकी होती है। खाने-पीने के सामान और बोतल में पानी भरते हुए वे युवा उन्हें ढांढस बंधाते हैं। यह दौर भी कट जाएगा और व्यवस्था अगर बेरहम है तो मददगार लोगों की कमी भी नहीं। हौसला रखिए। मदद कर दे रही भाव-विभोर : गया जंक्शन से पहले मार्शलिंग यार्ड है। करीमगंज मोहल्ला से सटे हुए। वहां ट्रेनों के ठहरते ही यात्रियों की मदद के लिए युवा जुट आते हैं। नजदीक के घरों से मोटर चालू कर पानी की पाइपें बोगियों तक पहुंचा दी जाती हैं। प्रवासी मजदूर अपनी बोतल-गैलन भर लेते हैं। तब तक खाने-पीने के पैकेट उनके आगे रख दिया जाता है। यह मदद प्रवासियों को भाव-विभोर कर जाती है। उनके होठों से शुभकामना के बोल फूट पड़ते हैं। ट्रेन के खुलते ही अभिवादन में हाथ हिल उठते हैं। मदद कर युवाओं की टोली निहाल: फिलहाल प्रवासियों की मदद कर युवा निहाल हैं। पुरानी करीमगंज खजुर खजूर गली निवासी मो. चांद चाहते हैं कि माशर्लिग यार्ड में श्रमिक स्पेशल ट्रेन को कुछ देर के लिए रोका जाए, ताकि सही तरीके से मदद पहुंचाई जा सके। मदद में कुम्हार गली के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे। ईद के दिन से यह शुरुआत हुई है। मो. जॉन, मो. हारुण और मो. आमिर आदि बताते हैं कि ट्रेन की गति धीमी होने पर प्रवासी मजदूर बगल के घरों से पानी मांगते। उस दृश्य को देख मदद की प्रेरणा मिली।

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