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    गया सोना लूटकांड: पूर्व रेल थानाध्यक्ष राजेश सिंह को बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 08:25 PM (IST)

    गयाजी के चर्चित सोना लूटकांड में पूर्व रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की जमानत याचिका अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, गयाजी रेल न्यायालय ने खारिज कर दी ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, गयाजी। गयाजी के चर्चित सोना लूटकांड में आरोपी गया रेल थाना के पूर्व थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को सोमवार को बड़ा झटका लगा। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, गयाजी रेल न्यायालय सुशांत सागर ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय में करीब आधे घंटे तक चली बहस के बाद यह फैसला सुनाया गया।

    जमानत याचिका पर बचाव पक्ष की ओर से गया व्यवहार न्यायालय के वरीय अधिवक्ता नीरज कुमार ने बहस की और आरोपी को जमानत देने की अपील की।

    वहीं, लोक अभियोजक विजय कुमार ने जमानत का कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। फिलहाल निलंबित पूर्व रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह न्यायिक हिरासत में गया केंद्रीय कारा में बंद हैं। उन्हें 31 दिसंबर 2025 को जेल भेजा गया था।

    यात्री से एक किलो सोना लूटने का आरोप

    यह मामला यात्री धनञ्जय शाश्वत से एक किलोग्राम सोना की लूट से जुड़ा है। घटना 21 नवंबर 2025 की रात गाड़ी संख्या 22307 हावड़ा–जोधपुर (बीकानेर) सुपरफास्ट एक्सप्रेस में हुई थी। आरोप है कि कोडरमा-गया के बीच जीआरपी के जवानों ने कुरियर कर्मी धनञ्जय शाश्वत के साथ मारपीट कर उसे ट्रेन से उतार दिया और सोना छीन लिया।

    पहले वादी, बाद में आरोपी बने थानाध्यक्ष

    इस मामले में चौंकाने वाली बात यह रही कि शुरुआत में गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के आवेदन पर 29 नवंबर 2025 को कांड संख्या 334/25 दर्ज की गई थी। बाद में जांच के दौरान उन्हीं की संलिप्तता सामने आई।

    पटना रेल एसएसपी डॉ. इनामुल हक ने बताया था कि सीडीआर, टावर लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर राजेश कुमार सिंह समेत चार सिपाही और दो सिविलियन की भूमिका सामने आई है।

    कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज, एसआईटी कर रही जांच:

    अनुसंधान के बाद कांड में बीएनएस की कई गंभीर धाराएं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7/13(2) जोड़ी गई हैं। इस मामले में गया रेल थाना के चार सिपाहियों को निलंबित किया जा चुका है।

    रेल पुलिस अधीक्षक, पटना के निर्देश पर मामले की गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। रेल पुलिस के अनुसार अनुसंधान जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।