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    दरभंगा में 31 वर्ष पुराने हत्याकांड मामले में दो चर्चित अधिवक्ता, मुखिया सहित पांच दोषी करार

    By Mukesh Srivastava Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 07:24 PM (IST)

    दरभंगा में 31 साल पुराने हत्या मामले में कोर्ट ने पांच लोगों को दोषी ठहराया है। इनमें दो अधिवक्ता भाई और एक मुखिया शामिल हैं। बसंत गांव में 1994 में र ...और पढ़ें

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    अधिवक्ता की सुनवाई में तैनात पुलिस। जागरण

    संवाद सहयोगी, दरभंगा। विशनपुर थानाक्षेत्र के बसंत गांव में 31 साल पहले हुई हत्या मामले में जिले के चर्चित दो सहोदर भाई अधिवक्ता, मुखिया सहित पांच आरोपितों को कोर्ट ने सोमवार को दोषी करार दिया है।

    अपर सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत से दोषी घोषित होने के बाद विशनपुर थानाक्षेत्र के बसंत निवासी अधिवक्ता कौशर इमाम हाशमी, उनके भाई अंबर इमाम हाशमी, रूपौली पंचायत के मुखिया राजा हाशमी, मोबिन हाशमी और अंजार हाशमी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    कोर्ट ने सजा पर बहस के लिए 31 जनवरी की तिथि निर्धारित की है। वहीं मृतक पक्ष पर दर्ज मामले में आरोपित नवीन कुमार चौधरी सहित सात को अदालत ने रिहा कर दिया। दोनों सहोदर भाई अधिवक्ता सहित अन्य के दोषी करार होने और जेल भेजे जाने की खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। दरभंगा व्यवहार न्यायालय परिसर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। अधिवक्ताओं में इसे लेकर चर्चा का विषय बना रहा।

    विशनपुर थानाक्षेत्र के बसंत गांव में आठ अगस्त 1994 की शाम पटोरी निवासी रामकृपाल चौधरी, रामपुकार चौधरी समेत एक दर्जन किसान भैंस को गुणसार पोखर में पानी पिलाकर घर लौट रहे थे। इसी बीच हथियार से लैस होकर आरोपितों ने सभी भैंस को कब्जे में लेकर जे जाने की कोशिश की।

    विरोध करने पर आरोपितों ने अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें रामकृपाल चौधरी की मौत हो गई। जबकि, पटोरी निवासी मोहन चौधरी, रविंदर चौधरी, अशोक चौधरी, कैलाश बिहारी चौधरी, संगीत चौधरी और रामपुकार चौधरी जख्मी हो गए। इसे लेकर दर्ज कांड संख्या 58/1994 से बने सत्रवाद संख्या 326/99 और 320/10 में कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर सभी को दोषी घोषित करते हुए बंधपत्र खंडित कर जेल भेज दिया।

    पीपी अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि 31 वर्ष पुराने हत्याकांड की सुनवाई काफी धीमी गति से चल रही थी। हालांकि, अवलोकन के बाद इस मामले को प्राथमिकता के साथ लिया गया। मात्र छह माह के अंदर सभी गवाहों की गवाही करा दी गई।

    सत्रवाद संख्या 320/10 में अधिवक्ता कौशर इमाम हाशमी को भादवि की धारा 302 (मानववध) 307 (जानलेवा हमला) 149 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 में दोषी घोषित किया गया है। जबकि, सत्रवाद संख्या 326/99 में अंबर इमाम हाशमी, राजा हाशमी, अंजार हाशमी और मोबिन हाशमी को भादवि की धारा 302, 307, 149 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 में दोषी घोषित किया गया है। यह फैसला 31 वर्ष चार माह 28 दिन बाद आया है।

    अभियोजन पक्ष से एपीपी रेणू झा ने बताया कि दोनों सत्रवाद में 16-16 गवाहों की गवाही कराई गई। जबकि, बचाव पक्ष की ओर से एक में 23 और दूसरे में 19 गवाहों की गवाही कराई गई।

    वादी के अधिवक्ता चंद्रकांत सिंह ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। लेकिन, उच्चतम न्यायालय और हाईकोर्ट ने त्वरित विचारण करने का आदेश पारित किया। इसके तहत त्वरित गति से सुनवाई की गई। इसमें बचाव पक्ष को राहत नहीं मिली।

    बता दें कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक आधा दर्जन आरोपितों की मौत हो चुकी है। इस मामले में आरोपित पक्ष के मो. हसन शकील हाशमी ने मृतक पक्ष के सात लोगों को आरोपित करते हुए कांड संख्या 57/94 दर्ज करा दिया था।