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    नए साल से उम्मीद, क्या दरभंगा के मछुआरों को मिलेगा किसान क्रेडिट कार्ड

    By Vinay Kumar Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 04:20 PM (IST)

    नए साल में दरभंगा के मछुआरे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। बैंक एनपीए बढ़ने के डर से ऋण देने में हिचक रहे हैं, जबकि 2022- ...और पढ़ें

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    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

    जागरण संवाददाता, दरभंगा। नए साल की दस्तक के साथ दरभंगा के मछुआरों की उम्मीदें भी फिर से जाग उठी हैं। वर्षों से सरकारी योजनाओं के भरोसे मछली पालन कर रहे ये मछुआरे आज भी किसान क्रेडिट कार्ड जैसे अहम लाभ से वंचित हैं।

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    सवाल यह है कि क्या नया साल इनके लिए राहत लेकर आएगा, या फिर योजनाएं एक बार फिर फाइलों में ही सिमट कर रह जाएंगी? प्रशासन और बैंकों की भूमिका पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।

    बैंक की उदासीनता के कारण मछली पालक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण बैंकों को डर है कि ये मछुआरे भी कर्ज माफी की उम्मीद में ऋण नहीं चुकाएंगे, जिससे उनका एनपीए बढ़ सकता है। मछुआरे नाव, जाल, या नाव की मरम्मत जैसी विभिन्न जरूरतों के लिए ऋण चाहते हैं।

    बैंकों और विभाग ने विभिन्न जरूरतों के लिए ऋण राशि तय की है, जैसे कि देशी नावों के लिए कार्यशील पूंजी 60,000 और निवेश राशि एक लाख तक हो सकती है। केसीसी योजना का उद्देश्य मछुआरा किसानों को उनकी उत्पादन और निवेश आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समय पर और पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराना है।

    ऋण की राशि की मंजूरी कितनी हो, यह बैंक पर निर्भर है। बताया जाता है कि किसानों को 60,000 से तीन लाख तक ऋण देने का प्रावधान है। मत्स्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर अब तक केसीसी ऋण प्राप्त करने के लिए 430 मछली पालक किसानों ने आवेदन किया है।

    अभी तक किसी भी किसान को केसीसी ऋण की स्वीकृति नहीं मिली है। जिले में लगभग दस हजार मछली पालक किसान हैं। तालाब की बात करें तो लगभग 12 हजार तालाब हैं, जिनमें 2409 सरकारी तालाब हैं। जिसका कुल रकवा 9244 हेक्टेयर बताया जा रहा है।

    जिले में प्रत्येक वर्ष लगभग 90 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। सरकार मछली पालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रखी हैं।

    बैंक अक्सर मत्स्य पालन को जोखिम भरा मानते हैं या दस्तावेजीकरण में दिक्कत करते हैं, जिससे किसान लोन से वंचित रह जाते हैं। जीविका के माध्यम से मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जीविका के साथ जुड़कर समूह के जरिए ऋण प्राप्त किया जा सकता है। जिसमें केसीसी के तहत ब्याज सब्सिडी दो प्रतिशत की छूट और तीन प्रतिशत प्रोत्साहन भी शामिल है। उसी के तहत किसानों को सस्ती ब्याज दर पर केसीसी ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

    केसीसी ऋण को लेकर किसानों से पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर जागरूक किया जाता है। आवेदन सृजन कराने के लिए क्षेत्रीय पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। 2022-2023 से अब तक केसीसी के लिए 430 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिन्हें विभिन्न बैंकों में भेज दिया गया है। अभी तक एक भी किसान का केसीसी ऋण की स्वीकृति नहीं मिली है।

    अनुपम कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, दरभंगा।

    मछली पालक किसान खेती भी करते हैं। ऐसा देखा गया है कि जो किसान खेती करते हैं, वे पहले ही केसीसी ऋण ले चुके हैं। इन किसानों को फिर से ऋण नहीं मिल पाता है। कई किसान केसीसी ऋण लेने के बावजूद सही समय पर ऋण नहीं जमा कर पाते हैं। जिसके कारण इनका सिविल स्कोर कम रहता है। इसके कारण भी बैंक ऋण देने से कतराती हैं।
    विकास कुमार, लीड बैंक प्रबंधक, दरभंगा।