दरभंगा में बीडीओ और पंचायत सचिव पर जुर्माना क्यों, आखिर गौड़ाबौराम में क्या हुई बड़ी चूक?
दरभंगा के गौड़ाबौराम प्रखंड में बीडीओ मिहिर मयंक और पंचायत सचिव अशोक सहनी पर सूचना के अधिकार अधिनियम के उल्लंघन के लिए पांच-पांच हजार रुपये का जुर्मान ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
संवाद सहयोगी, गौड़ाबौराम (दरभंगा)। बिहार के दरभंगा जिले के गौड़ाबौराम प्रखंड में प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आने के बाद बीडीओ और पंचायत सचिव पर पांच–पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर चूक और नियमों की अनदेखी को लेकर यह कार्रवाई की गई, जिससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना
सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना पर राज्य सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी मिहिर मयंक एवं आसी के पंचायत सचिव अशोक सहनीपर पांच-पांच हजार का अर्थदंड लगाया है। यह राशि उनके वेतन से काटकर सरकारी कोष में जमा कराई जाएगी। मामला राज कुमार झा द्वारा दायर अपील वाद संख्या ए 8293/22 से जुड़ा है।
राज्य सूचना आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ कि लोक सूचना अधिकारी ने न तो मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई और न ही आयोग के बार-बार निर्देश एवं चेतावनी के बावजूद सुनवाई में उपस्थित हुए।
आयोग द्वारा पूर्व में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि सूचना उपलब्ध कराते हुए प्रतिवेदन के साथ सुनवाई में उपस्थित हों, अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद न तो कोई प्रतिवेदन दाखिल किया गया और न ही कोई जवाब दिया गया।
वहीं वाद संख्या ए 8298/22 में आसी के पंचायत सचिव अशोक सहनी पर भी आरटीआइ के तहत लापरवाही का आरोप है। अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई सूचना समय पर नहीं दी गई और पंचायत सचिव अशोक सहनी सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष अनुपस्थित रहे।
12 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में अपीलकर्ता के साथ-साथ संबंधित लोक सूचना अधिकारी एवं पंचायत सचिव तीनों अनुपस्थित पाए गए, जिसे आयोग ने अत्यंत गंभीरता से लिया। राज्य सूचना आयुक्त ब्रजेश मेहरोत्रा ने इसे आरटीआई कानून की गंभीर अवहेलना करार देते हुए कहा कि सूचना न देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। इसी आधार पर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत अर्थदंड लगाया गया।
आयोग ने जिलाधिकारी एवं जिला कोषागार पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि अर्थदंड की राशि संबंधित अधिकारी एवं पंचायत सचिव के अगले वेतन से काटकर सुनिश्चित रूप से सरकारी कोष में जमा कराई जाए।
मामले की अगली सुनवाई की तिथि 24 फरवरी को निर्धारित की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली तिथि तक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई तो और अधिक कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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