कृत्रिम फूलों ने बदली तकदीर, जीविका से जुड़कर मलही देवी ने जीवन में भरा रंग
मलही देवी ने जीविका समूह से जुड़कर कृत्रिम फूलों के गुलदस्ते बनाने का काम शुरू किया। 51 हजार रुपये के ऋण से शुरू हुआ यह सफर अब उन्हें हर महीने 15-20 ह ...और पढ़ें

आत्मनिर्भरता और सपनों की सच्ची तस्वीर। फाइल फोटो
विनय कुमार, दरभंगा। Malhi Devi Success Story: दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड के हिरनी गांव की रहने वाली मलही देवी ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची लगन, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के साथ छोटे संसाधनों से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने हस्तनिर्मित कृत्रिम फूलों के गुलदस्ते बनाने का काम शुरू किया और आज वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं।
मलही देवी सबसे पहले प्रगति जीविका महिला ग्राम संगठन से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें 51 हजार रुपये का ऋण मिला, जिसे उन्होंने अपने हुनर को रोजगार में बदलने के लिए निवेश किया।
सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने घर से ही कृत्रिम पुष्पों के गुलदस्ते बनाने की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में बाजार तक पहुंच और बिक्री को लेकर चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
धीरे-धीरे उनके बनाए गुलदस्तों की गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइनों ने लोगों का ध्यान खींचा। गांव के साथ-साथ आसपास के बाजारों में उनके उत्पाद लोकप्रिय होने लगे।
आज मलही देवी हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। उन्होंने समय पर सभी ऋण चुका दिए हैं, जिससे उनकी साख और आत्मविश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।
इस आर्थिक सशक्तिकरण का असर उनके परिवार पर भी साफ दिखता है। बच्चों की पढ़ाई बेहतर स्कूलों में हो रही है और परिवार की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।
मलही देवी बताती हैं कि लक्ष्मी जीविका महिला ग्राम संगठन से मिले सहयोग ने उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे सही दिशा में उपयोग करने का हौसला दिया।
उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है। अब कई महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
मलही देवी का मानना है कि अगर मेहनत पर भरोसा रखा जाए और सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो कोई भी कठिनाई रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।
आज मलही देवी न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि छोटे कदम भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।
उनकी मेहनत से रंगीन हुए ये कृत्रिम फूल, दरअसल आत्मनिर्भरता और सपनों की सच्ची तस्वीर हैं-जो आने वाली पीढ़ियों को भी आगे बढ़ने की राह दिखाएंगे।

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