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    चादर से शरीर पूरी तरह ढंककर अस्‍पताल पहुंची मह‍िला; थोड़ी देर में श‍िशु के बिलखने की आवाज आई तो खुला माजरा

    By Ranjit Kumar Pandey Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 04:28 PM (IST)

    Buxar News: बक्सर के चौगाईं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक नवजात शिशु शौचालय में रोता मिला। एक महिला चादर से ढंककर अस्पताल आई और शिशु को छोड़कर चली ...और पढ़ें

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    चाइल्‍ड लाइन की टीम को श‍िशु सौंपते प्रभारी। जागरण

    संवाद सहयोगी, चौगाईं (बक्सर)। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार की सुबह उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब इमरजेंसी वार्ड के समीप शौचालय में एक नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी।

    इसकी सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते लोगों की भीड़ जमा हो गई। काफी संख्‍या में लोग पहुंचे तो वहां एक नवजात को बिलखता देखा। 

    प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ. मितेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि श‍िशु बालक है। मामले की सूचना तत्काल मुरार पुलिस और चाइल्ड लाइन को दी गई।

    जिला मुख्यालय से चाइल्ड लाइन के अधिकारी पहुंचने से पहले ही दर्जन भर लोगों ने नवजात को गोद लेने की इच्छा जाहिर की, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं के चलते अस्पताल प्रशासन ने शिशु को सौंपने से इंकार कर दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार की सुबह सफाईकर्मी जब इमरजेंसी वार्ड की सफाई कर रहे थे, तभी एक महिला एक युवती के साथ चादर से शरीर ढंककर अस्पताल पहुंची।

    प्रसूता ने न‍िभाया मां जैसा फर्ज 

    दोनों को देखकर सफाईकर्मियों ने समझा कि वे इलाज कराने आई हैं। कुछ ही क्षणों बाद वह महिला इमरजेंसी वार्ड के समीप स्थित शौचालय में नवजात शिशु को छोड़कर तेजी से बाहर निकल गई।

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    थोड़ी देर बाद शिशु के रोने की आवाज सुनकर सभी उधर गए तो बच्‍चे को देखकर हड़कंप मच गया। उसकी मां को ढूंढ़ने का प्रयास क‍िया गया लेकिन वह नहीं मिली। 

    सूचना मिलते ही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और सबसे पहले शिशु का समुचित इलाज कराया गया। चिकित्सकों के आग्रह पर अस्पताल में मौजूद एक प्रसूता ने मानवता का परिचय देते हुए बच्चे को दूध पिलाया।

    इसके बाद बक्सर से पहुंची चाइल्ड लाइन की टीम को शिशु सौंप दिया गया। अस्पताल कर्मियों ने आशंका जताई है कि जन्म देने के बाद शिशु को छोड़ने वाली मां ने शायद सामाजिक दबाव या भय के कारण ऐसा कदम उठाया हो।

    लेकिन उसने शिशु की जान बचाने के उद्देश्य से ही अस्पताल परिसर को चुना अन्यथा बाहर फेंकने के बाद लावारिस पशुओं से शिशु को बचाना मुश्किल हो जाता।