जीरोटिलेज तकनीक ने भरी किसानों की झोली
मौजूदा समय खेती का आधुनिकीकरण करते हुए नई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। ...और पढ़ें

बक्सर : मौजूदा समय खेती का आधुनिकीकरण करते हुए नई तकनीकों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। इसके तहत किसानों को खेती के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर अत्याधुनिक जीरोटिलेज मशीन का इस्तेमाल कर खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर के द्वारा किसानों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए उन्ही के खेतों में नई तकनीक से खेती कर उसके परिणाम क्रॉप क¨टग के माध्यम से दिखाए गए। तकनीक के बेहतर परिणाम और आधी से भी कम लागत में दोगुना उत्पादन देख किसान भी हैरत में पड़ गए कि आखिर यह कैसे हुआ।
कहां और कैसे कराई गई खेती
कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा सीसा परियोजना के सौजन्य से चौसा प्रखंड के राजापुर में जीरोटिलेज विधि से गेहूं की अगात बोवाई कराई गई थी। क्रॉप क¨टग के दौरान मौके पर मौजूद किसानों को 26 कुंतल प्रति एकड़ हुए रिकार्ड उत्पादन का वजन कराकर किसानों को दिखाया गया। मौके पर केवीके के पटना स्थित प्रधान कार्यालय के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. जेएस मिश्रा, डॉ. शीशपाल पुनिया, डॉ. मान्धाता ¨सह, डॉ. दीपक, डॉ. गोपाल पांडेय, डॉ. एके जैन समेत अन्य कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जीरोटिलेज से बोवाई के मिलने वाले फायदे के साथ ही इसे अपनाने और कम खर्च में अधिक से अधिक उत्पादन करने के सुझाव दिए।
क्या है जीरोटिलेज मशीन
इस मशीन के नाम से ही इसकी कार्यप्रणाली जाहिर हो जाती है। जीरो अर्थात शून्य और टिल अर्थात जुताई। मतलब ये कि बिना कोई जुताई किए बीज की खेतों में बोवाई करने अवाली मशीन का ही नाम जीरोटिलेज मशीन है। यह खेतों में बोवाई करने का अत्याधुनिक उपकरण है जो खेत को बिना जोते, बिना कोई नुकसान पहुंचाए बीज की बोवाई करता है।
जीरोटिलेज से खेत को मिलने वाला फायदा
इस तकनीक का इस्तेमाल करने से उत्पादन के अलावा और भी कई फायदे मिलते हैं। जिनमें सबसे पहला है कि खेत में मौजूद नमी बरकरार रहने के कारण समय की बचत, पानी की बचत, खाद की बचत के साथ ही बीज के बेहतर तरीके से अंकुरण होने का लाभ बीज को सीधे मिलता है। इस विधि को अपनाने से मिट्टी की पोषण क्षमता व स्वास्थ्य बरकरार रहने के साथ खेत की उर्वरा शक्ति को भी कोई नुकसान नही पहुंचता है।
कैसे काम करती है तकनीक
जैसा कि इसके नाम से ही जाहिर होता है कि एक फसल के कटने के बाद बिना खेतों की जोताई किए ही किसान अगली फसल के बीज की बोवाई करता है। जैसे धान की फसल को काटने के तुरंत बाद खेत की मिट्टी काफी बैठी होने से उसमें बरकरार नमी जोताई के कारण बर्बाद होने से बच जाती है। वहीं, खेत में सिर्फ एक चीरा लगाते हुए मशीन अगले फसल के बीज की बोवाई करता है। इससे बिना अतिरिक्त पानी दिए ही बीज में बेहतर तरीके से अंकुरण होता है और फसल का उत्पादन भी काफी अधिक होता है। इस विधि से खेती करने पर किसानों को उर्वरक भी कम मात्रा में देनी पड़ती है।
किसानों को पसंद आई तकनीक
क्रॉप क¨टग के दौरान मौके पर मौजूद कपिलदेव उपध्याय, राहुल राय, अनंत अभिनव और धनंजय राय समेत सैकड़ों किसानों को क्रॉप क¨टग के दौरान मिले परिणाम को देखते हुए तकनीक में अपनी रूचि दिखाई। इस दौरान किसानों ने अगले सीजन से इस तकनीक को अपनाने के वादे भी किए जिससे उन्हें भी इसका भरपूर लाभ मिल सके।
बयान :
जीरोटिलेज मशीन के इस्तेमाल से किसानों को कम लागत एवं समय की बचत करते हुए अधिक उत्पादन का लाभ होगा। इस विधि को अपनाने पर खेतों में पानी, खाद के साथ ही बीज की मात्रा भी कम लगती है, जिससे किसानों के लागत खर्च में काफी कमी आ जाती है।
डॉ.मान्धाता ¨सह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर।

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