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    डुमरांव नगर परिषद में हाईमास्ट लाइट घोटाला, 150 की जगह 95 लगाकर 18 करोड़ का भुगतान; 50% से अधिक खराब

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 05:48 PM (IST)

    डुमरांव नगर परिषद में हाईमास्ट लाइट लगाने में 18 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। 150 लाइटों के टेंडर के बावजूद केवल 95 लगाई गईं, जबकि पूरे का भुगतान ...और पढ़ें

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    डुमरांव नगर परिषद में हाईमास्ट लाइट घोटाला

    अनिल कुमार ओझा, डुमरांव (बक्सर)। डुमरांव नगर परिषद में भ्रष्टाचार का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों के बाद अब लाइटिंग व्यवस्था में भी करोड़ों रुपये के घोटाले के गंभीर आरोप सामने आए हैं। हाईमास्ट लाइट लगाने के नाम पर नगर परिषद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता किए जाने की चर्चा शहर में आम हो गई है।

    जानकारी के अनुसार, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार के कार्यकाल में शहर में 150 हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए टेंडर निकाला गया था। 

    150 की जगह केवल 95 हाईमास्ट लाइट लगाए गए

    आरोप है कि यह टेंडर एक करीबी एजेंसी को दिया गया। नगर परिषद के एक कर्मी का दावा है कि एजेंसी द्वारा 150 की जगह केवल 95 हाईमास्ट लाइट ही लगाए गए, जबकि भुगतान पूरे 150 लाइट का कर लिया गया। बताया जाता है कि एक हाईमास्ट लाइट की लागत करीब 12 लाख रुपये दिखाई गई, जिससे कुल भुगतान लगभग 18 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    लाइटों की संख्या ही नहीं, उनकी गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। नगर परिषद के बिजली मिस्त्री सिमरन ने वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी को दिए गए लिखित प्रतिवेदन में घटिया सामग्री के उपयोग की बात कही है। 

    50 प्रतिशत से अधिक खराब

    रिपोर्ट के अनुसार कई स्थानों पर टाइमर, कनेक्टर और लाइट स्टैंड तक नहीं लगाए गए, जिससे रखरखाव में भारी दिक्कत हो रही है। कहीं पर लाइट रात में नहीं जल रहा है तो कहीं दिन में बुझ नहीं रहा है। 

    स्थिति यह है कि चंद महीने पहले लगाए गए हाईमास्ट लाइट में से 50 प्रतिशत से अधिक खराब हो चुके हैं। थाना गेट, खिरौली मोड़, डूमरेजनी मंदिर, गौशाला रोड सहित कई प्रमुख चौक-चौराहे अंधेरे में डूबे हैं। मोहन जी गुप्ता कहते हैं कि घटिया लाइट से आम नागरिकों को परेशानी हो रही है और अपराध की आशंका भी बढ़ गई है।

    सभी हाई मास्ट लाइट की सूची सार्वजनिक करे नगर परिषद

    राजद नगर अध्यक्ष मुन्ना खान का आरोप है कि हाईमास्ट लाइट नगर परिषद के लिए कमाई का जरिया बन गई है। पूर्व के ऑडिट में भी लाइटिंग कार्य में अनियमितता उजागर हो चुकी है और कई अहम फाइलों के गायब होने की बात सामने आई है। 

    मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के रामबहादुर सिंह ने सभी हाईमास्ट लाइट की सूची स्थान और लागत के साथ सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच हुई तो नगर परिषद में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है। 

    श्यामजी गुप्ता, राजीव रंजन सिंह, मनोज सिंह, मोहनजी गुप्ता आदि ने भी नगर परिषद के हाई मास्ट लाइट की तत्काल जांच की मांग करते हुए कहा है कि यह निश्चित रूप से बहुत बड़ा मामला है तथा इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

    ऐसी शिकायत अभी जानकारी में नहीं आई है और न ही इसका फाइल देखने का मौका मिला है। अगर यह सही है, तो निश्चित रूप से बहुत बड़ा मामला है तथा दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।- राहुल धर दुबे, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, डुमरांव