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    UPSC Result 2024: जेएनयू से पीएचडी कर रहीं कविता ने बढ़ाया बक्सर का मान, दूसरे अटेम्प्ट में हासिल की ये रैंक

    Updated: Wed, 23 Apr 2025 04:22 PM (IST)

    चौगाईं प्रखंड के बसंतपुर गांव की कविता किरन सिंह ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 586वीं रैंक प्राप्त कर जिले का नाम रौशन किया है। कविता की इस सफलता पर गांव में खुशी की लहर है। आत्मविश्वास और माता-पिता के सहयोग से कविता ने यह मुकाम हासिल किया। पहले प्रयास में असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सफलता प्राप्त की।

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    बसंतपुर की बेटी कविता ने बढ़ाया जिले का मान, यूपीएससी में हासिल की 586वीं रैंक

    संवाद सहयोगी, चौगाईं (बक्सर)। जिले के चौगाईं प्रखंड अंतर्गत बसंतपुर गांव की रहने वाली कविता किरन सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC Result 2024) में 586वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने गांव का, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है। जैसे ही उनके चयन की खबर गांव पहुंची, वहां खुशी की लहर दौड़ गई।

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    ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और गर्व से भर उठे। कविता का यह सफर आसान नहीं था, लेकिन आत्मविश्वास, निरंतर परिश्रम और माता-पिता के सहयोग से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनके पिता सुरेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में अधिवक्ता हैं और कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री रह चुके हैं।

    डीपीएस से 12वीं, अब जेएनयू से कर रहीं पीएचडी

    उन्होंने बताया कि कविता की प्रारंभिक शिक्षा फातिमा स्कूल, मऊ से हुई, इसके बाद उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल से 12वीं पास की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से स्नातक तथा दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से परास्नातक किया। वर्तमान में वह जेएनयू से पीएचडी कर रही हैं।

    मां की रही अहम भूमिका

    कविता नेट व जेआरएफ भी पास कर चुकी हैं। कविता की मां सरोज सिंह गृहिणी हैं, लेकिन उनकी भूमिका बेटी की सफलता में महत्वपूर्ण रही। दूर रहते हुए भी उन्होंने हर कदम पर कविता का मार्गदर्शन किया।

    दूसरे अटेम्प्ट में मिली सफलता

    कविता ने बताया कि पहले प्रयास में असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी को और बेहतर किया। कविता ने बताया कि पहले प्रयास में असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी को और सुदृढ़ किया, जिसका फल अब मिला है।

    पैतृक गांव बसंतपुर में रह रहे उनके दादा भुवन सिंह ने कहा कि कविता की सफलता पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि उनकी मेहनत, समर्पण और अटूट विश्वास का परिणाम है।

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