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    स्थायी शिक्षकों की भारी कमी, अतिथि प्राध्यापकों के सहारे चल रहे वीकेएसयू के कई विभाग

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 02:55 PM (IST)

    वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (वीकेएसयू) में स्थायी शिक्षकों की भारी कमी उजागर हुई है। चार साल में 245 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के बावजूद 55% प ...और पढ़ें

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    वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय 

    जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (वीकेएसयू) में शिक्षकों की भारी कमी एक बार फिर उजागर हुई है। बीते चार वर्षों में विश्वविद्यालय में 18 विषयों में 245 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के बावजूद आज भी कई विभाग स्थायी शिक्षकों के अभाव में अतिथि शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि स्वीकृत पदों के मुकाबले 55 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है, जिससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और निरंतरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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    विश्वविद्यालय के संबद्धन विभाग के अनुसार वीकेएसयू के सभी अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों के कुल 852 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से अब तक केवल 442 पदों पर ही नियुक्ति हो सकी है।

    यानी करीब आधे से अधिक पद अब भी रिक्त हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में कुल 207 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं, जो नियमित शिक्षकों की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

    विश्वविद्यालय की प्रीमियम इकाई माने जाने वाले एचडी जैन कॉलेज, आरा में वनस्पति विज्ञान विभाग की स्थिति चिंताजनक है। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों की पढ़ाई होती है, लेकिन विभाग में केवल एक अतिथि शिक्षक के सहारे पढ़ाई संचालित हो रही है।

    स्थायी शिक्षक का पद पूरी तरह रिक्त है। इसी तरह एसबी कॉलेज, आरा में प्राकृत विभाग पूरी तरह अतिथि शिक्षक पर निर्भर है, जबकि उर्दू विभाग में स्नातक स्तर की पढ़ाई होने के बावजूद कोई शिक्षक नियुक्त नहीं है।

    जगजीवन कॉलेज, आरा में भी प्राकृत विषय केवल अतिथि शिक्षक के सहारे चल रहा है। त्रिदंडी स्वामी कॉलेज, शाहपुर में इतिहास विभाग में अतिथि शिक्षक हैं, लेकिन वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, वाणिज्य, प्राकृत और हिंदी जैसे प्रमुख विषयों में न तो स्थायी शिक्षक हैं और न ही अतिथि प्रोफेसर की व्यवस्था है।

    शेरशाह कॉलेज, सासाराम में उर्दू, दर्शनशास्त्र और जंतु विज्ञान विभाग अतिथि शिक्षकों के भरोसे हैं।

    एसवीबीपी कॉलेज, भभुआ में गणित और संस्कृत विषयों की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के माध्यम से हो रही है। वहीं श्री शंकर कॉलेज, सासाराम में संस्कृत और वाणिज्य विभाग पूरी तरह अतिथि शिक्षकों पर निर्भर हैं, जबकि उर्दू शिक्षक का पद रिक्त पड़ा है।

    एसपी जैन कॉलेज, सासाराम में जंतु विज्ञान और वनस्पति विज्ञान में अतिथि शिक्षक हैं, लेकिन उर्दू विषय में कोई शिक्षक नहीं है।

    सब डिवीजन कॉलेज, नोहटा की स्थिति सबसे गंभीर मानी जा रही है। यहां अंग्रेजी, दर्शनशास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र और वाणिज्य विभाग अतिथि असिस्टेंट प्रोफेसरों के सहारे चल रहे हैं।

    हिंदी, उर्दू, भौतिकी, रसायन, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, दर्शनशास्त्र, संस्कृत और प्राकृत जैसे विषयों में शिक्षक के पद पूरी तरह रिक्त हैं।

    छह वर्षों से उच्च शिक्षा की रीढ़ बने अतिथि शिक्षक

    पिछले पांच से छह वर्षों में अतिथि शिक्षक उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। नियमित नियुक्तियों में हो रही देरी के कारण विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की शैक्षणिक गतिविधियां इन्हीं शिक्षकों के भरोसे चल रही हैं।

    अतिथि शिक्षक न सिर्फ कक्षाएं ले रहे हैं, बल्कि परीक्षा कार्य, एनएसएस, एनसीसी, नैक, नोडल अधिकारी, पीआरओ और विभागाध्यक्ष प्रभारी जैसी जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं।

    वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आदित्य कुमार आनंद का कहना है कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति यूजीसी के नियमों और विश्वविद्यालय की चयन समिति द्वारा रोस्टर सिस्टम के तहत की गई है।

    उन्होंने कहा कि भले ही रिक्रूटमेंट रेजोल्यूशन में अतिथि शिक्षकों को क्लास आधारित मानदेय या 50 हजार रुपये प्रतिमाह देने की बात कही गई हो, लेकिन व्यवहार में उनसे नियमित शिक्षकों की तरह ही कार्य लिया जा रहा है।

    अतिथि शिक्षक संघ का मानना है कि सरकार को चाहिए कि वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि प्राध्यापकों की स्थिति को अस्थायी से स्थायी की ओर ले जाने पर गंभीरता से विचार करे। इससे न केवल शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और स्थायित्व भी सुनिश्चित हो सकेगा।