राजा 2800 तो रानी 3000 रुपये की...अंग्रेज चले गए, लेकिन छोड़ गए बेशकीमती निशानी; 3 साल में दोगुने से ज्यादा हुए दाम
बिहार के शाहपुर बाजार में धनतेरस पर ब्रिटिश शासनकाल के पुराने चांदी के सिक्कों की मांग बढ़ गई है। पिछले ...और पढ़ें

सोने की महंगाई के बीच पुराने चांदी के सिक्कों पर नजर
HighLights
पुराने ब्रिटिशकालीन चांदी के सिक्कों की मांग बढ़ी।
तीन साल में सिक्कों की कीमतें दोगुनी हुईं।
महारानी विक्टोरिया सिक्का राजा से 200 रुपये महंगा।
दिलीप कुमार ओझा,शाहपुर (आरा)। अंग्रेज भारत से चले गए, लेकिन उनकी निशानियां आज भी लोगों के बीच खास आकर्षण बनी हुई हैं। इसका नजारा बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर बाजार में देखने को मिल रहा है। धनतेरस और दीपावली के मौके पर इस बार आधुनिक चांदी के सिक्कों के साथ ब्रिटिश शासनकाल के राजा-महारानी वाले पुराने सिक्कों की भी खूब चर्चा है।
जार्ज पंचम की तस्वीर वाला राजा छाप सिक्का 2800 रुपये में बिक रहा है, जबकि विक्टोरिया महारानी की तस्वीर वाला सिक्का 3000 रुपये तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि पिछले तीन वर्षों में इनकी कीमत दोगुने से भी अधिक हो चुकी है।
सोने की महंगाई के बीच पुराने चांदी के सिक्कों पर नजर
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। हालांकि, सोने की बढ़ती कीमतों के बीच चांदी के पुराने सिक्के भी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं।
शाहपुर बाजार में कई लोग परंपरा के अनुसार राजा और रानी छाप वाले सिक्के खरीद रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों के लिए ये सिक्के इतिहास और पुराने दौर की यादों को संजोने का जरिया हैं।
राजा से 200 रुपये महंगी हैं महारानी, जानिए कीमत
बाजार में जार्ज पंचम की तस्वीर वाला राजा छाप चांदी का सिक्का करीब 2800 रुपये में बिक रहा है। वहीं, विक्टोरिया महारानी की तस्वीर वाले सिक्के की कीमत 3000 रुपये तक पहुंच गई है।
यानी महारानी वाला सिक्का राजा वाले सिक्के से 200 रुपये महंगा है। इन पुराने सिक्कों की कीमत उनकी उपलब्धता, शुद्धता और ऐतिहासिक महत्व के आधार पर भी तय होती है।
चोटी वाली विक्टोरिया महारानी के सिक्कों की भी खास पहचान
पुराने सिक्कों में विक्टोरिया महारानी की तस्वीर वाले सिक्कों की अलग पहचान है। वर्ष 1800 से 1885 के बीच ढाले गए कुछ सिक्कों पर महारानी के सिर के पीछे चोटी जैसी आकृति दिखाई देती है।
इसी वजह से इन्हें बाजार में चोटी वाली महारानी के सिक्के कहा जाता है। इनकी उपलब्धता सीमित होने के कारण संग्रहकर्ताओं के बीच इनकी खास मांग रहती है।
बनारस से आते हैं पुराने सिक्के, बाजार में सीमित उपलब्धता
शाहपुर के स्वर्ण व्यवसायी जितेंद्र कुमार उर्फ लाला जी के अनुसार, फिलहाल बाजार में 1900 के बाद के सिक्कों की मांग अधिक है। इससे पुराने सिक्के आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
शाहपुर में इनकी आपूर्ति मुख्य रूप से बनारस से होती है। कुछ स्थानीय लोग भी अपने पुराने सिक्के बेचने के लिए दुकानों पर पहुंचते हैं।
तीन साल में 1300 से 3000 रुपये तक पहुंची कीमत
पुराने चांदी के सिक्कों के दाम में पिछले तीन वर्षों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में इनकी कीमत करीब 1200 से 1300 रुपये थी।
वर्ष 2025 में रानी छाप सिक्का 2400 रुपये और राजा छाप सिक्का 2200 रुपये तक पहुंच गया था। वहीं, 2026 में रानी छाप की कीमत 3000 रुपये और राजा छाप की कीमत 2800 रुपये हो गई है।
इतिहास की निशानी के साथ निवेश और संग्रह का आकर्षण
ब्रिटिश शासनकाल के ये सिक्के अब केवल लेन-देन के पुराने माध्यम नहीं रह गए हैं। इनके ऐतिहासिक महत्व और सीमित उपलब्धता ने इन्हें संग्रह की खास वस्तु बना दिया है।
हालांकि, इनकी कीमत केवल चांदी के वजन से तय नहीं होती, बल्कि सिक्के की स्थिति, दुर्लभता और खरीदारों की मांग भी अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि धनतेरस पर अंग्रेजों के जमाने के राजा-महारानी वाले सिक्के एक बार फिर बाजार में भाव खा रहे हैं।
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