44 लाख रुपये का क्या हुआ? 16 वर्षों से हिसाब नहीं देने वाले भोजपुर के 7 नाजिरों का डीएम ने बंद किया वेतन
भोजपुर जिले में वित्तीय अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई हुई है। 2009 से 2021 तक 44 लाख रुपये के खर्च का हिसाब न देने वाले सात प्रखंडों के नाजिरों का दिस ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, आरा। Bhojpur News: भोजपुर जिले में वित्तीय अनुशासन को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। वर्ष 2009 से 2021 तक उपस्कर खरीद और पंचायत निर्वाचन के दौरान हुए खर्च का हिसाब अब तक नहीं देने वाले सात प्रखंडों के नाजिर का वेतन बंद कर दिया गया है।
डीएम के निर्देश पर उदवंतनगर, गड़हनी, संदेश, पीरो, तरारी, आरा और बिहिया प्रखंड के नाजिरों को स्पष्ट कर दिया गया है कि जब तक लंबित खर्च का पूरा विवरण, वाउचर और डीसी बिल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक दिसंबर का वेतन निर्गत नहीं किया जाएगा।
जिले के उपरोक्त सात प्रखंडों में कुल 44 लाख 53 हजार 89 रुपये का हिसाब वर्षों से लंबित है। यह राशि उपस्कर खरीद एवं पंचायत निर्वाचन कार्यों के दौरान खर्च की गई थी।
कई बार पत्राचार और मौखिक निर्देश के बावजूद संबंधित नाजिरों द्वारा संतोषजनक जवाब या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। अंततः जिलाधिकारी ने इसे गंभीर वित्तीय लापरवाही मानते हुए यह सख्त निर्णय लिया।
सभी संबंधित सभी बीडीओ को निर्देश दिया गया है कि वे वेतन भुगतान तत्काल प्रभाव से रोकें और लंबित राशि का हिसाब शीघ्र उपलब्ध कराएं। जिले में सबसे अधिक लापरवाही आरा, तरारी और गड़हनी प्रखंड में सामने आई है।
इन तीनों प्रखंडों में ही कुल लंबित राशि का बड़ा हिस्सा अटका हुआ है। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहराई है, बल्कि वर्षों पुराने मामलों का हिसाब नहीं मिलना सिस्टम पर भी सवाल खड़े करता है।
जिला प्रशासन का मानना है कि इतने लंबे समय तक बिल और वाउचर का नहीं मिलना सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक चूक है।
स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि पहले ही समय पर सख्ती बरती गई होती तो इतनी बड़ी राशि का हिसाब वर्षों तक लंबित नहीं रहती। अब इस कार्रवाई के बाद अन्य प्रखंडों में भी पुराने लंबित मामलों की जांच तेज होने की संभावना है।
सोलह वर्षों से नहीं मिल रहा हिसाब वित्तीय गड़बड़ी की आशंका
भोजपुर जिले के इन सात प्रखंड में पिछले 16 वर्षों से इसका हिसाब नहीं मिल रहा है। सबसे पुराना मामला उदवंतनगर, गड़हनी, आरा और तरारी का वर्ष 2008-09 से जुड़ा हुआ है।
इसके बाद संदेश-पीरो में वर्ष 2015-16 और 2016-17 से तथा बिहिया में वर्ष 2021 से जुड़ा हुआ मामला है। 16 वर्षों से हिसाब नहीं मिलने के कारण अब वित्तीय गड़बड़ी की आशंका होने लगी है।
इस वित्तीय वर्ष में यह हिसाब नहीं मिला तो इस मामले में कानूनी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता है। जिसमें तत्कालीन नाजिर और अन्य संबंधित कर्मियों का फंसना तय बताया जा रहा है।
डीसी बिल नहीं देने वाले प्रखंड
- तरारी 12,23,280 रुपये
- गड़हनी 8,43,318 रुपये
- आरा 7,37,095 रुपये
- बिहिया 6,11,000 रुपये
- उदवंतनगर 5,86,632 रुपये
- पीरो 2,86,764 रुपये
- संदेश 1,65,000 रुपये
- कुल 44,53,089 रुपये

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