कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर : भागलपुर के काजवलीचक में तीन मार्च की रात हुए भीषण धमाके के बाद विध्वंसक विस्फोटकों की तस्करी के चौंकाने वाली जानकारी बाहर आने लगी है। धमाके में 15 लोगों की जान जाने के बाद पुलिस ने स्थानीय तातारपुर थाने में हबीबपुर के चमेलीचक निवासी मुहम्मद आजाद समेत अन्य के विरुद्ध जानलेवा हमला, हत्या और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत केस दर्ज कराते हुए आतिशबाज लीलावती के कुनबे का सहारा लेकर आरोपित मुहम्मद आजाद की विस्फोटक पदार्थ की तस्करी में अहम भूमिका को उजागर कर दिया है। धमाके के बाद से आजाद भूमिगत हो गया है।

धमाके की जांच को गठित एसआइटी ने शुक्रवार की रात हबीबपुर के चमेलीचक-मोअज्ज्मचक स्थित आजाद के पुश्तैनी घर से उसके दो भाइयों मुहम्मद शोल्जर और शहजाद को हिरासत में ले लिया गया है। इधर धमाके बाद जांच में जुटे इंटेलिजेंस अधिकारियों ने आजाद के प्रतिबंधित बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेशी के पश्चिम बंगाल विंग से रिश्ते होने का संकेत दिया है। इंटेलिजेंस अधिकारियोंं ने यह जानकारी जुटाई है कि विध्वंसक विस्फोटकों की तस्करी और उसे पश्चिम बंगाल के बशीरहाट, मोटियाबुर्ज, चौबीस परगना, सांतरागाछी, बरुईपुर जैसे इलाके में पहुंचाने के लिए पूर्व से भागलपुर, मुंगेर और झारखंड के तस्करों की संलिप्तता सामने आ चुकी है।

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आजाद की सरपरस्ती में परंपरागत पटाखे के कारोबार से कभी नाता रखने वाले काजवली चक के शंकर मंडल, महेंद्र मंडल की मौत के बाद लीलावती और उसके कुनबे की मदद से झारखंड से चोरी-छिपे विध्वंसक विस्फोटक मंगाने का सिलसिला आजाद की सरपरस्ती में शुरू किया गया। उसे पश्चिम बंगाल तक चोरी-छिपे बाजार भी दिया जा रहा था। इसी कारण ग्रिल कारखाने की आड़ लेकर लीलावती के कुनबे से जमीन-मकान की रजिस्ट्री कराने के बाद भी इस जरायम धंधे पर पर्दा डालते हुए उसके कुनबे को आजाद काजवली चक में ही बसाए रखा। अचानक हुए भीषण धमाके ने विध्वंसक विस्फोटक पदार्थों की तस्करी का अंदर ही अंदर चल रहे तगड़े नेटवर्क के उजागर होने पर भागलपुर पुलिस ही नहीं सुरक्षा एजेंसियां भी चौंक गई।

कोलकाता में हालांकि भागलपुर के जमील और शकूर की 22 दिसंबर 2021 को हुई गिरफ्तारी बाद सुरक्षा एजेंसियों को उसके भागलपुर, मुंगेर और झारखंड कनेक्शन को लेकर साक्ष्य मिले थे लेकिन तब भागलपुर के दागी आतिशबाजों की सक्रियता को लेकर दोनों को लेकर भागलपुर पहुंची कोलकाता एसटीएफ की टीम ने तब भागलपुर की मोजाहिदपुर, हबीबपुर और तातारपुर पुलिस से संपर्क साधी थी लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी थी। मुहम्मद आजाद की भूमिका उजागर नहीं हुई थी। अब मामले में केस दर्ज होते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो आजाद के तगड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुट गई है।

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि ग्रिल बनाने के कारोबार की आड़ लेने वाले आजाद की सरपरस्ती में ही जरायम पेशेवर झारखंड के दुमका, बोकारो और धनबाद से विस्फोटकों को मंगा कर उसे काजवलीचक में डंप कर उसे भागलपुर से सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल पहुंचाया करते थे। लीलावती और उसका कुनबा आजाद की सरपरस्ती में ही काजवली चक में रहते हुए विध्वंसक विस्फोटकों की तस्करी को अंजाम दे रहा था। इंटेलिजेंस अधिकारियों की माने तो इसके लिए लेनदेन में विट-काइन का इस्तेमाल किया जा रहा था।

कोलकाता के मोटियाबुर्ज और सांतरागाछी इलाके में आजाद से जुड़े एजेंट दूसरे समुदाय से जुड़े नाम-पते की पहचान के साथ रहते हुए विस्फोटकों और हथियारों की तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। चौबीस परगना, बशीरहाट, बरुईपुर समेत पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्से में सक्रिय प्रतिबंधित बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन से जुड़े लोगों तक विस्फोटक पहुंचाने की भी बात सामने आ रही है।

Edited By: Shivam Bajpai