स्वामी विवेकानंद की जयंती : ... तो यहां होता बेलूर मठ
जमुई के सिमुलतला दो बार आए थे स्वामी विवेकानंद। सिमुलतला की जलवायु को विश्व की सबसे बेहतर जलवायु में एक बताया। यहां मंदिर में स्थापित है रामकृष्ण परम ...और पढ़ें
जमुई [संदीप कुमार सिंह]। स्वामी विवेकानंद दो बार, 1887 व 1889 में सिमुलतला आए थे। यहां की जलवायु से प्रभावित होकर उन्होंने इसे विश्व की सबसे बेहतर जलवायु में से एक बताया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विवेकानंद को लेकर सिमुलतला के विकास की घोषणा कर चुके हैं। समुलतला अगर प्रधानमंत्री के सपनों का स्वरूप लिया तो यह बिहार का अतिमहत्वपूर्ण स्थल बन जाएगा।
विवेकानंद सिमुलतला में एक विश्वस्तरीय मठ स्थापित करना चाहते थे। उनके आगमन का प्रसंग बांग्ला किताब 'संपूर्ण भ्रमण स्वामी विवेकानंद नामक किताब में अंकित है। उस समय कोलकाता में बेलूर मठ की स्थापना नहीं हुई थी। स्वामी जी पेट के रोग से ग्रसित थे। अपने प्रिय मित्र सुरेंद्रनाथ बनर्जी (कांग्रेस अध्यक्ष) के कहने पर सिमुलतला आए थे। स्वामी जी पहली बार सिमुलतला के सास्थो कोठी में 15 दिनों के प्रवास पर आए थे। दूसरी बार तीन महीने सुरेंद्रनाथ बनर्जी की कोठी में उन्होंने अपना बसेरा बसाया था। स्थानीय लोगों की मानें तो सिमुलतला की आबोहवा से प्रभावित होकर स्वामीजी बेलूर मठ की स्थापना सिमुलतला में ही करना चाहते थे।

चूंकि यहां आवागमन के साधनों की दिक्कत थी, इस कारण बेलूर मठ की स्थापना कोलकाता में की गई। उस समय सिमुलतला घने जंगल से घिरा हुआ था। यहां हिंसक जानवर रहते थे। स्वामी जी के नजदीकियों में से एक विलासानंद जी महाराज एवं बेलूर मठ के प्रथम अध्यक्ष ब्रह्मानंद महाराज ने स्वामी जी की सोच को मूर्त रूप देने के लिए खरना (बांका) के जमींदार से जमीन दान में लेकर सिमुलतला में 1916 में श्री आनंदपुर रामकृष्ण मठ की स्थापना कराई। यह मठ कोलकाता के बेलूर मठ से 19 वर्ष पूर्व बन गया। अभी सेवक चितोदानंदा महाराज के नेतृत्व में एक कमेटी इस मठ को पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है। कमेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसे लेकर पत्र भी लिखा है। हर साल यहां स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई जाती है।

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