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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिर में अत्याधिक जुओं से हो गई चार साल की बच्ची की मौत, बिहार के बांका के पालना घर का एक्सक्यूज

By Shivam BajpaiEdited By:
Published: Mon, 24 Jan 2022 01:55 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 02:47 PM (IST)

हे भगवान ये कैसी नियति- सिर पर इतने परजीवी हो गए कि एक चार साल की बच्ची की सांसें थम ...और पढ़ें

जुओं की वजह से हो गई बच्ची की मौत।
जुओं की वजह से हो गई बच्ची की मौत।

जागरण टीम, बांका: बिहार के बांका जिले के स्थानीय बाबूटोला स्थित पालना घर में एक चार साल की बच्ची चित्रा दुर्गा की सोमवार को मौत हो गई। बच्ची के शव को चाइल्ड लाइन द्वारा पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। बच्ची को एक माह पूर्व भागलपुर जिले के नाथनगर से लाया गया था। बच्ची की मौत के मामले में चाइल्ड लाइन का कहना है कि सिर पर अत्याधिक जुओं के चलते बच्ची बीमार हो गई और उसकी मौत हो गई। इस तरह के एक्सक्यूज ने कई सवाल अपने पीछे छोड़ दिए हैं।

इधर, चाइल्ड लाइन के समन्वयक मनोज सिंह ने बताया कि पिछले सप्ताह बच्ची के साथ दाई ने मारपीट की थी। इसकी शिकायत मिली थी। चर्चा है कि बच्ची को काम करने वाली दाई ने गुस्से में पटक दिया था। जिसके कारण उसके सिर में जख्म हो गया था। इस कारण बच्ची की मौत हो गई। इस मामले में थानाध्यक्ष शंभू यादव ने बताया कि अभी तक इस मामले में किसी ने लिखित शिकायत नहीं की है। बच्ची के शव को चौकीदार के माध्यम से पोस्टमार्टम के लिए बांका सदर अस्पताल भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी बच्ची के माैत के सही कारणों का पता चलेगा। फिलहाल, पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

डॉ. अनीश ने बताया कि बच्ची के सिर में जख्म के निशान है। जुओं से मौत नहीं हो सकती है। जुओं से किसी बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव जरूर पड़ सकता है लेकिन मौत, इसका सवाल नहीं उठता।

पालना घर पर सवाल 

यूं तो बिहार के शेल्टर होम हमेशा से सुर्खियों में रहें हैं। अब पालना घर पर इस तरह के मामले से कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। क्या एक बच्ची के सिर पर जुओं की इतनी संख्या पहले पालना घर के लोगों को नहीं दिखाई दी। क्या चाइल्ड लाइन ने इस गाइडलाइन का ख्याल नहीं रखा कि बच्चों की सेहत की ट्रेसिंग समय-समय पर की जाएगी। बच्चों की केयरिंग को लेकर कितनी जागरूक है पालना घर कर्मचारी? 

बता दें कि जिस पालना घर में बच्ची की मौत हुई है, वहां महज आठ बच्चे ही हैं। इनमें तीन लड़के और पांच लडकियां हैं। इसके बाद सवाल और भी बड़ा हो जाता है कि कम संख्या में बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी भी सही ढंग से नहीं ली जा रही।

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