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    अरे भैया इ का? अब शिक्षक बनने के लिए ये काम करना जरूरी, बिहार में वर्षों से पढ़ा रहे गुरुजी भी हो रहे फेल

    Bihar Teacher शिक्षकों के कमर कस लेने का समय आ गया है। अब ज्ञान के आधार पर बहाली होगी। संविदा शिक्षकों की बहाली में शैक्षणिक अनुभव को नहीं माना जाएगा बल्कि इच्छुक सभी आवेदकों को इंटरव्यू देना होगा। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि 15 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को भी इंटरव्यू देना होगा। 25-30 आवेदकों में मात्र तीन से चार ही साक्षात्कार में पास हो रहे हैं।

    By Sanjay SinghEdited By: Aysha SheikhUpdated: Tue, 10 Oct 2023 10:31 AM (IST)
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    अरे भैया इ का? अब शिक्षक बनने के लिए ये काम करना जरूरी, बिहार में वर्षों से पढ़ा रहे गुरुजी भी हो रहे फेल

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय प्रशासन वोकेशनल और प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई कराने वाले संविदा शिक्षकों की बहाली में शैक्षणिक अनुभव को नहीं मानेगा। बहाली के इच्छुक सभी आवेदकों को इंटरव्यू से गुजरना होगा।

    इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि टीएमबीयू में अलग-अलग विषयों के शिक्षकों को लेकर चल रहे इंटरव्यू में अधिकांश लोग फेल हो रहे हैं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि चाहे शिक्षक 15 साल से पढ़ा रहे हों, उन्हें भी अभी जारी बहाली प्रक्रिया से गुजरना होगा और इंटरव्यू देना होगा।

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    बिना इंटरव्यू के नहीं पढ़ा सकेंगे

    कुलपति प्रो. जवाहर लाल ने कहा कि वोकेशनल और प्रोफेशनल कोर्स में संविदा पर शिक्षकों की बहाली के लिए हो रहे इंटरव्यू में जो पास होंगे, वे ही शिक्षक बनेंगे। कोई शिक्षक 15 साल या इससे भी पहले से पढ़ा रहे हैं और इस आधार पर बिना इंटरव्यू लिए उनकी सेवा जारी रखने का दावा कर रहे हैं, तो यह मान्य नहीं होगा।

    कुलपति ने कहा कि अगर किसी विषय में 25-30 आवेदक हैं, तो मात्र तीन से चार ही साक्षात्कार में पास हो रहे हैं। जो आवेदक असफल हो रहे हैं, उनमें वर्षों से पढ़ाते रहे कई शिक्षक भी हैं। यही वजह है कि इनसे पढ़े ज्यादातर छात्र उन मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं, जो प्लेसमेंट के लिए जरूरी है।

    शिक्षकों ने क्या मांग की थी?

    साथ ही कुलपति ने कहा कि संविदा की अवधि 11 महीने की होती है। इसके बाद सेवा रिन्यूअल करने के लिए भी इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। बताते चलें कि वोकेशनल-प्रोफेशनल कोर्स में कई वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों ने टीएमबीयू प्रशासन सहित राजभवन से मांग की थी कि चूंकि वे कई वर्षों से पढ़ा रहे हैं, इसलिए उन्हें साक्षात्कार से अलग रखा जाए।

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