Bihar News: अधिवक्ता कामेश्वर पांडेय और रेणु झा हत्याकांड में किराएदार गोपाल भारती दोषी करार, 23 फरवरी को सुनाई जाएगी सजा
अधिवक्ता कामेश्वर पांडे एवं उनकी दाई रेणु झा की हत्या से केस में किरायेदार आरोपित गोपाल भारती दोषी करार दिया गया। कोर्ट ने 23 फरवरी को सजा सुनाने की तिथि तय कर दी है। मालूम हो कि पांच मार्च 2020 की रात तिलकामांझी थानाक्षेत्र के लालबाग कॉलोनी स्थित घर में वरीय अधिवक्ता और उनकी दाई की हत्या बेरहमी से कर दी गई थी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार स्टेट बार काउंसिल के को-चेयरमेन रहे वरीय अधिवक्ता कामेश्वर पांडे एवं उनकी दाई रेणु झा की हत्या से केस में किरायेदार आरोपित गोपाल भारती दोषी करार दिया गया। गुरुवार को एडीजे 11 के न्यायालय में सुनवाई के दौरान दोषी करार देते हुए 23 फरवरी को सजा सुनाने की तिथि तय कर दी है।
न्यायाधीश ने आरोपित रविश कुमार सिंह और राज कुमार को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया। एक आरोपित गब्बर पासवान का केस रिकार्ड बाद मे हुई गिरफ्तारी के कारण अलग बनी है, जो दौरा सुपुर्द की प्रक्रिया में एसीजेएम सुचित कुमार वाजपेयी की अदालत में लंबित है। सरकार की तरफ से अपर लोक अभियोजक ओमप्रकाश तिवारी ने बहस में भाग लिया है।
पांच मार्च 2020 की रात लालबाग कॉलोनी स्थित आवास में हुई थी हत्या
मालूम हो कि पांच मार्च 2020 की रात तिलकामांझी थानाक्षेत्र के लालबाग कॉलोनी स्थित घर में वरीय अधिवक्ता और उनकी दाई की हत्या बेरहमी से कर दी गई थी। उनका शव बेडरूम में विस्तर पर बरामद हुआ था। जबकि नौकरानी रेणु झा का शव घर के ग्राउंड फ्लोर में रखे ड्रम में छिपा दिया गया था। हत्या को अंजाम देने के बाद आवास में मौजूद गैराज में रखी कामेश्वर पांडेय की सियाज कार से ही आरोपित भाग निकले थे।
भागकर गोपाल भारती किशनगंज स्थित अपने रिश्तदार अरविंद कुमार के घर रुका था। जहां टेलीविजन पर हत्याकांड का प्रसारण देख अरविंद के लड़के प्रसनजीत मुन्ना ने घरवालों को जानकारी दी तो गोपाल आदि वहां से भाग कर पश्चिम बंगाल पहुंच गए थे। जहां से उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
तत्कालीन रेंज डीआइजी सुजीत कुमार ने 5 घंटे में सुलझा दी थी गुत्थी
इस चर्चित दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने को तत्कालीन एसएसपी आशीष भारती, सिटी एसपी सुशांत कुमार सरोज मौके पर पहुंचे थे। सुराग नही मिल रहा था। घटना से आहत बार काउंसिल आफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने तब डीजीपी से हत्यारों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग करते हुए दवाब बनाया था। हाइप्रोफाइल मामला होने के कारण डीजीपी ने रेंज डीआइजी सुजीत कुमार को भी घटनास्थल पर भेजा था।
सुजीत कुमार ने घटनास्थल का मुआयना कर चंद घंटे में ही किराएदार गोपाल भारती की भूमिका उजागर कर दी थी। उंसके कमरे की तलाशी में खून धोने आदि के साक्ष्य मिल गए थे। उंसके बाद तकनीकी जांच करते हुए बबरगंज के सकरुल्ला चक से रवीश कुमार सिंह की गिरफ्तारी कर पुलिस ने हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली थी। फिर गोपाल और राजकुमार की पश्चिम बंगाल से गिरफ्तारी हुई थी। किशनगंज से कार भी बरामद कर लिया गया था।
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