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Bihar Bhumi: गैर-मजरूआ जमीन का हो गया दाखिल-खारिज, ऑपरेटरों और राजस्व अधिकारी की मिलीभगत से हुआ घोटाला

Published: Mon, 05 Jan 2026 01:48 PM (IST)

भागलपुर के जगदीशपुर अंचल में गैर-मजरूआ सरकारी जमीन का अवैध दाखिल-खारिज सामने आया है। कानून के खिलाफ जाकर दो अलग-अलग ...और पढ़ें

जगदीशपुर में गैरमजरूआ जमीन का हो गया दाखिल-खारिज

जगदीशपुर में गैरमजरूआ जमीन का हो गया दाखिल-खारिज

HighLights

  1. जगदीशपुर में गैर-मजरूआ सरकारी जमीन का अवैध दाखिल-खारिज।

  2. ऑपरेटरों और राजस्व अधिकारी की मिलीभगत से हुआ घोटाला।

  3. उपमुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को मामले से अवगत कराया गया।

जागरण संवाददाता, भगलपुर। सरकारी तो सरकारी अब गैर-मजरूआ जमीन को भी लोगों के नाम से दाखिल-खारिज (Bihar Land Mutation) करने का मामला सामने आया है। कानूनन बिहार सरकार की गैर-मजरूआ जमीन किसी के नाम दाखिल-खारिज नहीं हो सकती, लेकिन जगदीशपुर अंचल में दो अलग-अलग खाता-खेसरा में सात डिसमिल गैर-मजरूआ जमीन को दूसरे के नाम दाखिल-खारिज कर दिया गया।

इस मामले से उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा व जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी को रविवार को साक्ष्य सहित अवगत कराया गया है। यह खेल दूसरे अंचल कार्यालय के आपरेटर और एक राजस्व अधिकारी की मिलीभगत से हुआ है। भूमि का दाखिल-खारिज वाद संख्या-2955/2025-26 व 2957/2025-26 है।

खाता संख्या 499, खेसरा संख्या 39 में दो डिसमिल और खाता संख्या 428, खेसरा संख्या 36 में पांच डिसमिल जमीन का दाखिल-खारिज किया गया है।

जगदीशपुर के अंचलाधिकारी सतीश कुमार का कहना है कि अगर गैरमजरूआ जमीन का दाखिल-खारिज हुआ है तो मामले को अपील में भेजा जाएगा। गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

ऑपरेटरों के आवास पर चल रहे अंचल के काम

कई अंचलों के कार्य ऑपरेटरों व राजस्व अधिकारी के आवास पर चल रहे हैं। ऑपरेटर अंचल अधिकारी के डोंगल का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि दाखिल-खारिज व परिमार्जन का कार्य सरकारी कार्यालय में उपस्थित होकर करने का निर्देश है, लेकिन अंचलाधिकारी एवं राजस्व अधिकारी, जगदीशपुर का डोंगल आपरेटर द्वारा अपने निजी आवास (ज्योति विहार कालोनी, जीरोमाइल, भागलपुर) पर उपयोग कर बहुत से दाखिल-खारिज व परिमार्जन के कार्य किए गए।

बहुत से दाखिल-खारिज व परिमार्जन गलत तरीके से किए गए। जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान मामला संज्ञान में आने के बाद तत्कालीन अंचलाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया था। आपरेटर अपने अंचल को छोड़कर जगदीशपुर अंचल का कार्य अपने आवास पर कर रहे हैं।

बताया गया कि निजी स्वार्थ की पूर्ति नहीं होने पर दाखिल-खारिज के वादों को आब्जेकशन में डाल दिया जाता है, या राशि नहीं मिलने पर आवेदन रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। एक मोबाइल नंबर पर आनलाइन माध्यम से पैसे लिए जाने की भी चर्चा है। आपरेटर द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की भी चर्चा सुनी जा रही है।