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    Bhagalpur News: भागलपुर के आम, लीची और केला किसानों के लिए खुशखबरी, फलों को विदेश भेजना होगा आसान

    Updated: Sat, 03 May 2025 01:32 PM (IST)

    भागलपुर में आम लीची और केला की फसल अब बर्बाद नहीं होगी। जिले में दो मीट्रिक टन का इंटीग्रेटेड पैक हाउस बनेगा जिसके लिए जिलाधिकारी ने कृषि विभाग को पत्र लिखा है। इससे फल और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा किसानों को उचित मूल्य मिलेगा और उन्हें देश-विदेश भेजना आसान होगा। प्रदेश का पहला एकीकृत पैक हाउस पटना जिले के बिहटा में स्थापित किया गया है।

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    भागलपुर के किसानों के फल नहीं होंगे बर्बाद

    नवनीत मिश्र, भागलपुर। आने वाले समय में आम, लीची और केले की फसल बर्बाद नहीं होगी। जिले में दो मीट्रिक टन के इंटीग्रेटेड पैक हाउस का निर्माण होगा। इसको लेकर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कृषि विभाग के सचिव को पत्र लिखा है।

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    इंटीग्रेटेड पैक हाउस का निर्माण होने के बाद फलों और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उनकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद होगी।

    दो मीट्रिक टन का पैक हाउस बनेगा

    जिले में नौ हजार हेक्टेयर में आम, दो हजार हेक्टेयर में केला और नौ सौ हेक्टेयर में लीची की खेती होती है। इंटीग्रेटेड पैक हाउस नहीं होने के कारण फल व सब्जियों के विपणन में काफी समस्याएं आ रहीं हैं।

    किसानों को उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। साथ ही 20 ये 30 प्रतिशत उत्पाद बर्बाद हो जा रहा है। ऐसे में अब जिले में दो मीट्रिक टन का पैक हाउस बनेगा।

    बिहटा में प्रदेश का पहला पैक हाउस

    बिहार में पहला एकीकृत पैक हाउस पटना जिले के बिहटा में स्थापित किया गया है। एकीकृत पैक हाउस में बागवानी उत्पादों की कटाई के बाद की प्रक्रिया होती है, जिसमें ग्रेडिंग, छंटाई, प्रीकूलिंग, कोल्ड स्टोरेज और पैकेजिंग शामिल हैं।

    फल को तोड़ने के बाद पहले वासिंग की जाती है। इसके बाद उसकी छंटाई होती है। अंत में ग्रेडिंग की जाती है। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आठ से दस सेंटीग्रेड तापमान पर आठ घंटे के लिए टैपिंग चैंबर में रखा जाता है। यहां से निकलने के बाद फल के पकने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

    इससे लंबे समय तक फल सड़ता नहीं है। इसके कारण किसानों को फसल की अच्छी कीमत मिल जाती है। इस प्रक्रिया के बाद देश-विदेश में फल भेजने में किसानों को परेशानी नहीं होगी। अभी यहां के किसान फल को बिहटा, वाराणसी, लखनऊ व केलकाता भेजते हैं। इसमें किसानों को काफी खर्च हो जा रहा है। कुछ ही लोग इसमें लगे हैं।

    सुल्तानगंज में होगी बेल व फूल की खेती

    जिला उद्यानिक फसलों आम, केला, लीची, हरी सब्जियां, मधुमक्खी पालन के लिए जाना जाता है। अजगैवीनाथ धाम व अन्य प्रखंडों में उद्यान के क्षेत्र में विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को उद्यानिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

    सुल्तानगंज स्थित अजगैवीनाथ नाथ धाम से बहने वाली उत्तरवाहिनी गंगा से गंगा जल लेकर श्रद्धालु देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए प्रस्थान करते हैं। देवघर में बेलपत्र व फूल खरीदकर बाबा बैद्यनाथ पर चढ़ाते हैं।

    निर्णय लिया गया कि अजगैवीनाथ धाम व इसके आसपास के क्षेत्रों में बेल व वैसे फूल जिनकी उपयोगिता 48 घंटे से 71 घंटे तक हो, उन फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है।

    इससे श्रद्धालु अजगैवीनाथ धाम से गंगा जल, बेल पत्र व फूल एक साथ लेकर बाबा धाम के लिए प्रस्थान करेंगे। इससे स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि व आधारभूत संरचना का विस्तार होने की संभावना है।

    अजगैवीनाथ धाम व इसके आसपास के क्षेत्रों में कलस्टर बनाकर बेल व फूल की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है। प्रारंभ में कम से कम बेल के लिए एक कलसटर व गेंदा फूल के लिए दो क्लस्टर लक्ष्य देने का आग्रह कृषि विभाग के सचिव से किया गया है।

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